SIR में कितने वोटर नाम हटे? जानें राज्यवार आंकड़े और पूरी प्रक्रिया

CG DARSHAN
CG DARSHAN 6 Min Read
6 Min Read
Advertisement Carousel

भारत में मतदाता सूचियों का विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR जारी है। SIR में कितने वोटर नाम हटे यह सवाल लगातार चर्चा में है। चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार, तीन चरणों में 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के ड्राफ्ट रोल में 13.37 करोड़ नाम कम हुए हैं। यह आंकड़ा पूर्व SIR मतदाता सूचियों की तुलना पर आधारित है।

हालांकि, ड्राफ्ट रोल में नाम नहीं होना अंतिम विलोपन नहीं है। संबंधित मतदाताओं को दावा और आपत्ति दर्ज कराने का अवसर मिलता है। इसके बाद दस्तावेजों और रिकॉर्ड की जांच की जाती है।

SIR में कितने वोटर नाम हटे और सबसे ज्यादा असर कहां?

1 सितंबर 2026 को सामने आए आंकड़ों के अनुसार, देशभर में ड्राफ्ट रोल से 13.37 करोड़ नाम कम हुए। यह पूर्व SIR मतदाता सूची का करीब 14.1 प्रतिशत है। दिल्ली में कमी का प्रतिशत सबसे अधिक दर्ज हुआ।

दिल्ली में SIR से पहले करीब 1.45 करोड़ मतदाता थे। ड्राफ्ट रोल में यह संख्या करीब 97.53 लाख रह गई। यानी करीब 47.7 लाख नाम ड्राफ्ट सूची में नहीं रहे। यह करीब 32.8 प्रतिशत की कमी है।

महाराष्ट्र में भी बड़ा बदलाव दर्ज हुआ। यहां करीब 9.78 करोड़ मतदाताओं की पुरानी संख्या थी। ड्राफ्ट रोल में यह संख्या करीब 7.71 करोड़ रही। यानी करीब 2.07 करोड़ नाम कम हुए।

SIR में कितने वोटर नाम हटे, आंकड़े कैसे समझें?

इन आंकड़ों को सीधे अंतिम विलोपन नहीं माना जा सकता। SIR के दौरान मतदाता रिकॉर्ड का दोबारा सत्यापन किया जाता है। मृत्यु, स्थान परिवर्तन और डुप्लीकेट प्रविष्टियां भी जांच का हिस्सा हैं।

दिल्ली में ड्राफ्ट सूची से बाहर हुए मतदाताओं को दावा दाखिल करने का अवसर दिया गया। इसके लिए निर्धारित समय में Form 6 और संबंधित दस्तावेज जमा किए जा सकते हैं।

इसलिए किसी मतदाता का नाम ड्राफ्ट सूची में नहीं मिलना अंतिम फैसला नहीं है। दावा स्वीकार होने पर नाम अंतिम सूची में शामिल हो सकता है।

किन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में SIR हुआ?

SIR की प्रक्रिया अलग-अलग चरणों में आगे बढ़ी है। पहला चरण बिहार में जून से सितंबर 2025 के बीच हुआ। इसके बाद नौ राज्यों और तीन केंद्र शासित प्रदेशों में दूसरा चरण लागू किया गया।

तीसरे चरण में चुनाव आयोग ने 16 राज्यों और तीन केंद्र शासित प्रदेशों को शामिल किया। इस चरण में करीब 36.73 करोड़ मतदाताओं का सत्यापन होना था। करीब 3.94 लाख BLO को घर-घर जाकर प्रक्रिया में लगाया गया।

मई 2026 के अंत में ओडिशा, मिजोरम, सिक्किम और मणिपुर में तीसरे चरण की गणना शुरू हुई।

दिल्ली और महाराष्ट्र में क्या बदला?

दिल्ली में करीब 47.7 लाख नाम ड्राफ्ट मतदाता सूची से बाहर हुए। इसके बाद दावे और आपत्तियों की प्रक्रिया शुरू हुई। अधिकारियों के अनुसार, नाम नहीं मिलने वाले मतदाता निर्धारित प्रक्रिया के तहत दावा कर सकते हैं।

महाराष्ट्र में करीब 2.07 करोड़ नाम ड्राफ्ट रोल में शामिल नहीं थे। राज्य में भी इन मामलों की जांच और दावे की प्रक्रिया रखी गई है। अंतिम सूची आने से पहले आंकड़ों में बदलाव संभव है।

दिल्ली में SIR नोटिस को लेकर भी विवाद सामने आया है। 33 लाख से ज्यादा मतदाताओं को नोटिस मिलने की रिपोर्ट है। इन नोटिसों में रिकॉर्ड से जुड़ी अलग-अलग विसंगतियों का उल्लेख किया गया।

SIR को लेकर क्यों उठे सवाल?

SIR की प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक दलों और विभिन्न समूहों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। कुछ दलों ने सत्यापन और दस्तावेजों की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं।

23 सितंबर 2026 की एक रिपोर्ट में दो चुनाव आयुक्तों द्वारा 10 महीनों में 14 बार आपत्तियां दर्ज करने का दावा किया गया। रिपोर्ट में SIR और आयोग की कार्यप्रणाली से जुड़े मुद्दों का उल्लेख है।

दूसरी ओर, चुनाव आयोग SIR को मतदाता सूची के व्यापक पुनरीक्षण की प्रक्रिया बताता है। आयोग का घोषित उद्देश्य पात्र नागरिकों को सूची में बनाए रखना है। साथ ही अपात्र प्रविष्टियों को हटाना भी प्रक्रिया का हिस्सा है।

इसलिए SIR में कितने वोटर नाम हटे समझते समय ड्राफ्ट और अंतिम सूची का अंतर महत्वपूर्ण है।

मतदाताओं को किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?

  • पहले ड्राफ्ट मतदाता सूची में अपना नाम जांचें।
  • नाम नहीं मिलने पर संबंधित कारण की जानकारी लें।
  • निर्धारित समय में दावा या आपत्ति दाखिल करें।
  • जरूरी दस्तावेज सही तरीके से जमा करें।
  • अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित होने के बाद फिर जांच करें।

आगे क्या होगा?

  • अधिकारियों द्वारा दावों और आपत्तियों की जांच होगी।
  • पात्र मतदाताओं के नाम दोबारा शामिल हो सकते हैं।
  • रिकॉर्ड में गलतियां मिलने पर सुधार किया जा सकता है।
  • अलग-अलग राज्यों में तय तारीखों पर अंतिम सूची जारी होगी।
  • अंतिम सूची से वास्तविक बदलाव का आंकड़ा स्पष्ट होगा।

कुल मिलाकर, SIR में कितने वोटर नाम हटे इसका जवाब चरण और तारीख के अनुसार बदल सकता है। अभी उपलब्ध आंकड़ों में 13.37 करोड़ नाम ड्राफ्ट रोल में कम हुए हैं। दिल्ली में करीब 47.7 लाख और महाराष्ट्र में करीब 2.07 करोड़ नाम ड्राफ्ट में शामिल नहीं रहे।

हालांकि, इन आंकड़ों को अंतिम विलोपन नहीं माना जाना चाहिए। दावे और आपत्तियों के बाद कई नाम वापस शामिल हो सकते हैं। अंतिम मतदाता सूची जारी होने के बाद ही पूरी स्थिति स्पष्ट होगी।

Share This Article
Leave a comment