शनिवार अमावस्या 10 अक्टूबर को, शनि पूजा के साथ करें पितरों का स्मरण

CG DARSHAN
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10 अक्टूबर को आश्विन मास की अमावस्या पड़ रही है। इस बार अमावस्या शनिवार के दिन है। इसलिए इसे शनिवार अमावस्या के रूप में भी जाना जा रहा है।

यह तिथि पितृ पक्ष के समापन का दिन भी रहेगी। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन पितरों का स्मरण, श्राद्ध और तर्पण किया जाता है। शनिवार होने के कारण शनि देव से जुड़े पूजा-पाठ भी किए जा सकते हैं।

सुबह शनि देव की पूजा से करें दिन की शुरुआत

शनिवार अमावस्या पर सुबह जल्दी उठकर स्नान करने की परंपरा है। इसके बाद पूजा स्थल पर दीपक जलाया जा सकता है। शनि देव के मंत्र का जाप भी किया जाता है।

पूजा के लिए काले तिल, जौ, कच्चा दूध और जल का इस्तेमाल किया जा सकता है। ‘ॐ शं शनैश्चराय नमः’ मंत्र का जाप 108 बार करने की मान्यता है। इसके बाद जल पीपल के पेड़ में अर्पित किया जा सकता है।

पीपल के नीचे दीपक जलाना शुभ

शनिवार को पीपल पूजन का विशेष धार्मिक महत्व बताया गया है। शाम के समय पीपल के पास घी का दीपक जलाया जा सकता है। श्रद्धालु अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार पूजा कर सकते हैं।

मान्यता के अनुसार शनिवार को पीपल पूजन से शुभ फल प्राप्त होते हैं। इसलिए इस दिन पीपल के पेड़ की पूजा और दीपदान की परंपरा कई स्थानों पर निभाई जाती है।

शनि मंदिर में तेल अर्पित करने की परंपरा

शनिवार अमावस्या के दिन शनि मंदिर जाकर पूजा करने की भी मान्यता है। श्रद्धालु शनि देव को सरसों का तेल अर्पित कर सकते हैं। इसके साथ काले तिल और काली उड़द चढ़ाने की परंपरा भी है।

शनि देव को काला वस्त्र अर्पित करना भी कई धार्मिक परंपराओं में शामिल है। पूजा के दौरान श्रद्धा और संयम बनाए रखने पर जोर दिया जाता है।

पितरों के लिए करें श्राद्ध और तर्पण

अमावस्या पितृ पक्ष की अंतिम तिथि रहेगी। इसलिए इस दिन ज्ञात और अज्ञात पितरों के लिए श्राद्ध किया जा सकता है। जिन पूर्वजों का श्राद्ध किसी कारण से नहीं हो पाया, उनके लिए भी कर्म करने की मान्यता है।

दोपहर के समय पितरों के निमित्त तर्पण और धूप-ध्यान किया जा सकता है। परिवार अपनी परंपरा के अनुसार श्राद्ध की विधि अपना सकता है।

धूप-ध्यान में काम आएंगी ये सामग्री

पितरों के लिए धूप देने में कंडे, घी, काले तिल और चावल इस्तेमाल किए जा सकते हैं। गुड़, कपूर और फूल भी पूजा सामग्री में रखे जा सकते हैं। जल से भरा तांबे का लोटा भी उपयोग किया जाता है।

सभी सामग्री उपलब्ध न होने पर उपलब्ध वस्तुओं से भी श्रद्धापूर्वक पितरों का स्मरण किया जा सकता है। खीर और पूरी से धूप देने की परंपरा भी कुछ परिवारों में है।

दान और सेवा को भी माना गया है महत्वपूर्ण

शनिवार अमावस्या पर धार्मिक कर्मों के साथ सेवा करने की भी परंपरा है। जरूरतमंद लोगों को भोजन कराया जा सकता है। बच्चों को खाना खिलाना भी पुण्य कार्य माना जाता है।

रोगियों को दवाओं में सहायता देने जैसे कार्य भी किए जा सकते हैं। इसके अलावा गाय, कुत्ते और कौए को भोजन कराने की परंपरा पितृ कर्म से जुड़ी है।

कौए को पितरों का प्रतीक मानकर भोजन कराने की मान्यता कई परिवारों में है। इसलिए इस दिन अपनी श्रद्धा के अनुसार यह सेवा की जा सकती है।

हनुमान जी की पूजा भी कर सकते हैं

शनिवार को हनुमान जी की पूजा करने की भी धार्मिक मान्यता है। उनके सामने दीपक जलाकर हनुमान चालीसा का पाठ किया जा सकता है।

मान्यता के अनुसार इससे शनि से जुड़े दोषों के प्रभाव को कम करने में सहायता मिल सकती है। हालांकि, ऐसे धार्मिक उपाय आस्था और परंपरा पर आधारित होते हैं।

 

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