राम मंदिर चंदा विवाद: जमीन के सौदे पर कांग्रेस का सवाल

CG DARSHAN
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अयोध्या स्थित राम मंदिर से जुड़े जमीन के सौदों और श्रद्धालुओं से प्राप्त दान को लेकर कांग्रेस ने एक बार फिर सवाल उठाए हैं। पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा पर निशाना साधते हुए मंदिर ट्रस्ट से जुड़े वित्तीय लेन-देन में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग की है। कांग्रेस का आरोप है कि जमीन की खरीद-बिक्री में कीमतों का बड़ा अंतर सामने आया, लेकिन जांच से संबंधित जानकारी अब तक सार्वजनिक नहीं की गई है।

कांग्रेस ने मांग की है कि मंदिर में प्राप्त चढ़ावे का पूरा विवरण सार्वजनिक किया जाए और कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच हो। पार्टी ने इस मामले में संबंधित लोगों की भूमिका स्पष्ट करने की भी मांग की है। हालांकि, आरोपों की पुष्टि के लिए आधिकारिक दस्तावेजों और जांच के निष्कर्षों का सामने आना जरूरी है।

दो करोड़ से 18.5 करोड़ रुपये तक पहुंची जमीन की कीमत पर सवाल

जयराम रमेश ने राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़े जमीन के एक सौदे का उल्लेख करते हुए कीमत में बड़े अंतर पर सवाल उठाए। उनके अनुसार, शाम 7:10 बजे कुसुम पाठक से संबंधित जमीन दो करोड़ रुपये में खरीदी गई थी। इसके पांच मिनट बाद, शाम 7:15 बजे, उसी जमीन को ट्रस्ट ने 18.5 करोड़ रुपये में खरीद लिया।

कांग्रेस नेता ने सवाल किया कि इतने कम समय में जमीन की कीमत में इतनी बड़ी बढ़ोतरी कैसे हुई। उन्होंने इस सौदे की परिस्थितियों और संबंधित दस्तावेजों को सार्वजनिक करने की मांग की।

पार्टी का कहना है कि इस मामले में उठे सवालों का स्पष्ट जवाब मिलना चाहिए। वहीं, लेन-देन की वास्तविक परिस्थितियों और किसी संभावित अनियमितता के बारे में निष्कर्ष निकालने के लिए दस्तावेजों तथा आधिकारिक जांच की जानकारी महत्वपूर्ण होगी।

जमीन की रजिस्ट्री और जांच के नतीजों पर चर्चा

जयराम रमेश ने जमीन की रजिस्ट्री से जुड़े गवाहों के नामों को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि संबंधित दस्तावेजों में तत्कालीन भाजपा महापौर ऋषिकेश उपाध्याय और ट्रस्ट के सदस्य अनिल मिश्रा गवाह थे।

कांग्रेस नेता ने वर्ष 2021 में हुई जांच का उल्लेख करते हुए पूछा कि उसकी रिपोर्ट अब तक सार्वजनिक क्यों नहीं की गई। उन्होंने जमीन के सौदों की जांच कर रही विशेष जांच टीम के निष्कर्ष सामने लाने की मांग भी की।

कांग्रेस का आरोप है कि मामले को लेकर लगातार सवाल उठाए जाने के बावजूद जांच की स्थिति स्पष्ट नहीं हुई है। रिपोर्ट की मौजूदा स्थिति और संबंधित अधिकारियों की ओर से उपलब्ध जानकारी सामने आने पर विवाद के इस पहलू को बेहतर ढंग से समझा जा सकेगा।

पीएम मोदी और योगी आदित्यनाथ से जवाब चाहती है कांग्रेस

इस मुद्दे पर कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर भी सवाल उठाए हैं। पार्टी का कहना है कि मंदिर निर्माण के लिए श्रद्धालुओं से जुटाए गए धन और चढ़ावे के उपयोग को लेकर स्पष्ट जानकारी सार्वजनिक होनी चाहिए।

जयराम रमेश ने भाजपा, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और विश्व हिंदू परिषद पर निशाना साधते हुए दान के उपयोग में जवाबदेही की मांग की। कांग्रेस का आरोप है कि संबंधित मामले में जिम्मेदार लोगों की भूमिका की जांच होनी चाहिए और यदि किसी प्रकार की अनियमितता प्रमाणित होती है, तो नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।

प्राथमिकी दर्ज करने में देरी पर भी कांग्रेस ने उठाए सवाल

कांग्रेस ने कथित चोरी से जुड़े एक वीडियो और प्राथमिकी दर्ज करने की प्रक्रिया को लेकर भी सवाल किए। पार्टी के मुताबिक, चार जून को संबंधित वीडियो सामने आने के बाद प्राथमिकी दर्ज करने में 21 दिन की देरी हुई थी।

कांग्रेस ने इस देरी के कारणों को स्पष्ट करने और मामले से जुड़े सभी पहलुओं की जांच कराने की मांग की है। पार्टी का कहना है कि जांच प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए और उसके निष्कर्ष सार्वजनिक किए जाने चाहिए।

हालांकि, इस दावे की पुष्टि के लिए प्राथमिकी से संबंधित रिकॉर्ड, घटना की समयरेखा और आधिकारिक पक्ष का सत्यापन जरूरी है।

चढ़ावे का पूरा हिसाब सार्वजनिक करने की मांग

राम मंदिर चंदा विवाद के बीच कांग्रेस ने मंदिर ट्रस्ट से दान और चढ़ावे के उपयोग का विस्तृत ब्योरा जारी करने की मांग दोहराई है। पार्टी चाहती है कि जमीन की खरीद-बिक्री से जुड़े दस्तावेजों और जांच की प्रगति के बारे में स्पष्ट जानकारी उपलब्ध कराई जाए।

यह मामला राजनीतिक आरोपों, जमीन के लेन-देन और वित्तीय पारदर्शिता से जुड़े सवालों के कारण चर्चा में है। आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि, संबंधित पक्षों के जवाब और जांच के निष्कर्ष सामने आने के बाद ही मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

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