दिल्ली के जंतर-मंतर पर एक बार फिर किसानों की आवाज़ गूंज उठी। हजारों किसान सोमवार को एकजुट होकर न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) को कानूनी अधिकार बनाने की मांग को लेकर पहुंचे। किसानों का कहना है कि खेती को लाभकारी बनाने और कृषि संकट को दूर करने का एकमात्र रास्ता MSP को कानून में शामिल करना है।
किसानों ने साफ कहा कि बार-बार आंदोलन की नौबत इसलिए आती है क्योंकि फसलों का सही दाम नहीं मिलता। पंजाब, हरियाणा और अन्य राज्यों से आए किसान नेताओं ने सरकार से गुहार लगाई कि उद्योगपतियों के बड़े कर्ज माफ किए जाते हैं, तो किसानों का कर्ज भी खत्म किया जाए।
पंजाब के किसान नेता सुखविंदर सिंह ने कहा कि देश के किसानों पर कुल कर्ज 15 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा नहीं है, जबकि उद्योगपतियों के लाखों करोड़ माफ हो चुके हैं। ऐसे में किसानों को कर्ज से राहत देना जरूरी है।
वहीं, हरियाणा के किशन पाल चौधरी ने कहा कि किसान सम्मान निधि की राशि बेहद कम है और इससे किसानों की ज़रूरतें पूरी नहीं होतीं। उनका सुझाव है कि हर किसान परिवार को कम से कम ₹12,000 वार्षिक सहायता दी जानी चाहिए।
इस दौरान किसानों ने अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक समझौतों पर भी चिंता जताई। उनका कहना था कि अगर अमेरिका से कृषि या डेयरी उत्पादों के आयात पर सहमति बनी, तो भारतीय किसान और अधिक संकट में फंस जाएंगे। किसान नेताओं ने सरकार से मांग की कि किसी भी समझौते से पहले किसानों से चर्चा की जाए और कृषि उत्पादों को ऐसे समझौतों से बाहर रखा जाए।
जंतर-मंतर पर हुआ यह प्रदर्शन किसानों के बीच एक नए आंदोलन की आहट माना जा
