Delhi AQI 500 पार: राजधानी की हवा में ज़हर, पराली और धूल बनी बड़ी चुनौती

दिल्ली में वायु प्रदूषण ने तोड़े सभी रिकॉर्ड — हवा में सांस लेना हुआ खतरनाक

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दिल्ली की वायु गुणवत्ता इस सीजन में सबसे खराब स्थिति में पहुंच गई है। वायु प्रदूषण सूचकांक (AQI) 500 के पार पहुंचने के साथ राजधानी की हवा ‘गंभीर’ श्रेणी में दर्ज की गई है।
झिलमिल में पीएम 2.5 का स्तर 512 और आनंद विहार में 501 दर्ज हुआ, जबकि मदर डेयरी क्षेत्र में पीएम 10 का स्तर 564 तक पहुंच गया। आईटीओ, आनंद विहार और नरेला जैसे क्षेत्रों में भी हवा में ज़हरीले तत्वों की मात्रा खतरनाक स्तर पर है।

मौसम विभाग के अनुसार, हवा की रफ्तार बेहद कम होने के कारण प्रदूषणकारी कण दिल्ली की सीमा से बाहर नहीं निकल पा रहे। ऐसे में अगले कुछ दिनों तक दिल्लीवासियों को प्रदूषण से राहत मिलने की कोई संभावना नहीं है।

पराली और वाहन प्रदूषण ने बढ़ाई मुश्किलें:

दिल्ली के प्रदूषण में इस बार भी सबसे बड़ा योगदान पराली जलाने और वाहनों से निकलने वाले धुएं का रहा है। पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में खेतों में पराली जलाने की घटनाएं बढ़ गई हैं, जिनका असर सीधा दिल्ली की हवा पर दिख रहा है।

हालांकि दिल्ली सरकार ने कुछ वाहनों पर प्रतिबंध लगाया है, लेकिन निर्माण कार्य, सड़क की धूल और स्थानीय यातायात प्रदूषण का स्तर बनाए हुए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक क्षेत्रीय स्तर पर सामूहिक कदम नहीं उठाए जाते, तब तक दिल्ली की सांसें सामान्य नहीं हो पाएंगी।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चेतावनी:

दिल्ली में अस्पतालों में सांस से जुड़ी शिकायतों वाले मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है।
चिकित्सकों ने सलाह दी है कि इस समय बुजुर्ग, बच्चे, गर्भवती महिलाएं और पहले से बीमार लोग यथासंभव घर में ही रहें।
डॉ. प्रदीप बरनवाल ने कहा कि बाहर निकलते समय एन95 मास्क का प्रयोग करें और प्रदूषण से बचने के लिए खुली हवा में अधिक समय न बिताएं।
साथ ही, सुबह की सैर या आउटडोर वर्कआउट को फिलहाल टालने की सलाह दी गई है।

ट्रांसपोर्ट संगठनों की अपील:

ट्रांसपोर्ट एसोसिएशनों का कहना है कि व्यावसायिक वाहनों की संख्या में कमी के बावजूद प्रदूषण स्तर में कोई कमी नहीं आई है।
ऑल इंडिया मोटर एंड गुड्स ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष राजेन्द्र कपूर ने कहा कि “सरकार को केवल वाहनों को जिम्मेदार ठहराने के बजाय निर्माण कार्य, धूल, कचरा प्रबंधन और बायोमास जलाने जैसे अन्य कारणों की भी वैज्ञानिक जांच करनी चाहिए।”

उन्होंने जोर देकर कहा कि प्रदूषण नियंत्रण के लिए नीति आधारित समाधान की आवश्यकता है, ताकि आने वाले वर्षों में दिल्ली की वायु गुणवत्ता में स्थायी सुधार लाया जा सके।

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