सुप्रीम कोर्ट ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) में हस्तक्षेप और बूथ लेवल ऑफिसर्स (BLO) को धमकाने की घटनाओं को बेहद गंभीर माना है। अदालत ने सुनवाई के दौरान चुनाव आयोग से साफ शब्दों में कहा कि यदि किसी राज्य सरकार द्वारा SIR में सहयोग नहीं किया जा रहा या BLO को डराने-धमकाने जैसी शिकायतें सामने आ रही हैं, तो आयोग तत्काल न्यायालय के संज्ञान में लाए। सुप्रीम कोर्ट ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि हालात और बिगड़ते हैं तो प्रशासनिक व्यवस्था संभालने के लिए पुलिस तैनात करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा।
चुनाव आयोग ने अदालत को अवगत कराया कि उसके पास ऐसे मामलों से निपटने के सभी संवैधानिक अधिकार मौजूद हैं और वह अपने अधिकारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की क्षमता रखता है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने दोबारा स्पष्ट किया कि BLO के खिलाफ किसी भी तरह की धमकी या SIR में बाधा की घटनाओं को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा, क्योंकि ऐसा जारी रहा तो व्यवस्था अराजक हो सकती है।
इसी बीच, मतदाता सूची पुनरीक्षण प्रक्रिया को पारदर्शी और बाधारहित बनाने के लिए चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल में पांच वरिष्ठ IAS अधिकारियों को स्पेशल रोल ऑब्ज़र्वर (SRO) नियुक्त किया है। इसमें रक्षा मंत्रालय के संयुक्त सचिव कुमार रवि कांत सिंह को प्रेसिडेंसी संभाग की जिम्मेदारी दी गई है, गृह मंत्रालय के नीरज कुमार बांसोद मेदिनीपुर संभाग की देखरेख करेंगे, जबकि सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के कृष्ण कुमार निराला को बर्दवान संभाग के लिए नियुक्त किया गया है। शेष दो अधिकारियों की जिम्मेदारी अन्य संभागों में निगरानी कार्य को मजबूत करना है।
पश्चिम बंगाल में मतदाता सूचियों का विशेष गहन पुनरीक्षण 4 नवंबर को शुरू हुआ है और अंतिम मतदाता सूची 14 फरवरी 2026 को प्रकाशित की जाएगी। आयोग को भरोसा है कि SRO की नियुक्ति से SIR प्रक्रिया और पारदर्शी, सुरक्षित व प्रभावी हो सकेगी।
