छत्तीसगढ़ की पारंपरिक जनजातीय कला को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने वाले ढोकरा शिल्प कलाकारों ने रायपुर में राज्यपाल श्री रमेन डेका से सौजन्य भेंट की। यह मुलाकात न केवल कलाकारों के लिए सम्मानजनक रही, बल्कि राज्य की सांस्कृतिक विरासत को सम्मान देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल भी मानी जा रही है।
सारंगढ़ जिले के जनजातीय बहुल ग्राम बैगनडीह (सालर) से आए राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित शिल्प कलाकारों ने इस अवसर पर ढोकरा (बेल मेटल) शिल्प कला से निर्मित एक सुंदर एवं आकर्षक मूर्ति राज्यपाल को भेंट की। यह कलाकृति ढोकरा शिल्प की बारीक कारीगरी, पारंपरिक तकनीक और सांस्कृतिक प्रतीकों को दर्शाती है।

राज्यपाल श्री रमेन डेका ने कलाकारों को बधाई और शुभकामनाएं देते हुए कहा कि ढोकरा शिल्प जैसी जनजातीय कलाएं भारत की सांस्कृतिक विरासत की अमूल्य धरोहर हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे शिल्पकार अपनी कला के माध्यम से देश की परंपराओं को जीवंत बनाए रखते हैं। राज्यपाल ने कलाकारों की सृजनात्मक सोच, परिश्रम और समर्पण की सराहना करते हुए आश्वासन दिया कि सरकार द्वारा उन्हें प्रोत्साहित करने और उनकी कला को आगे बढ़ाने के लिए हरसंभव सहयोग दिया जाएगा।
उल्लेखनीय है कि ग्राम बैगनडीह (सालर) के प्रख्यात ढोकरा शिल्पी मीन केतन बघेल को वर्ष 2018 में तथा उनकी धर्मपत्नी श्रीमती हीराबाई बघेल को वर्ष 2023 में उनके उत्कृष्ट शिल्प कार्य के लिए राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। दोनों कलाकारों ने ढोकरा बेल मेटल शिल्प को एक विशिष्ट पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
इस सौजन्य भेंट के दौरान पूर्व विधायक श्रीमती केराबाई मनहर सहित अन्य ग्रामीणजन भी उपस्थित रहे, जिससे कार्यक्रम और भी गरिमामय बन गया।

