राज्यपाल श्री रमेन डेका ने रायपुर में संत शदाराम साहिब भाषा भवन की रखी आधारशिला

CG DARSHAN
CG DARSHAN 3 Min Read
3 Min Read
Advertisement Carousel

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में भाषा और संस्कृति के संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की शुरुआत हुई। राज्यपाल रमेन डेका ने बुधवार को संत शदाराम साहिब भाषा भवन की आधारशिला रखी और मातृभाषा के महत्व पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि मनुष्य की भावनाओं—चाहे वह दुख हो या खुशी—को व्यक्त करने का सबसे सरल और प्रभावी माध्यम उसकी मातृभाषा ही होती है।

इस अवसर पर राज्यपाल ने पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के अंतर्गत इनोवेशन एवं इन्क्यूबेशन सेंटर द्वारा आयोजित आइडियाथॉन कार्यक्रम का भी शुभारंभ किया।

मातृभाषा से जुड़ा होता है भावनात्मक रिश्ता

राज्यपाल ने कहा कि मातृभाषा व्यक्ति के जीवन और संस्कृति से गहराई से जुड़ी होती है। जब हम किसी अनजान स्थान पर अपनी भाषा बोलने वाले व्यक्ति से मिलते हैं तो तुरंत एक आत्मीयता और अपनापन महसूस होता है। यही भाषा की सबसे बड़ी शक्ति है।

भाषाई विविधता में एकता की पहचान

उन्होंने कहा कि भारत अपनी विविध भाषाओं और समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं के लिए जाना जाता है। देश में अनेक भाषाएं और बोलियां प्रचलित हैं, लेकिन यह विविधता हमारी एकता को मजबूत करती है। उन्होंने संस्कृत को भारतीय भाषाओं की प्राचीन धरोहर बताते हुए कहा कि इसके शब्द आज भी कई भारतीय भाषाओं में दिखाई देते हैं।

सिंधी भाषा के संरक्षण की दिशा में अहम पहल

राज्यपाल ने संत शदाराम साहिब भाषा भवन के निर्माण को सिंधी भाषा और संस्कृति के संवर्धन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने कहा कि पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय में सिंधी भाषा में डिप्लोमा और एमए पाठ्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं, जो इस भाषा को जीवंत बनाए रखने में सहायक हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि विभाजन के बाद सिंधी समाज ने भारत के विभिन्न राज्यों में बसकर अपने परिश्रम और उद्यमशीलता से देश के आर्थिक और सामाजिक विकास में उल्लेखनीय योगदान दिया है। छत्तीसगढ़ में भी सिंधी समाज की बड़ी उपस्थिति है।

भाषाओं का संरक्षण हमारी जिम्मेदारी

राज्यपाल ने कहा कि भारतीय भाषाएं हमारी सांस्कृतिक पहचान और विरासत की धरोहर हैं। इनका संरक्षण और संवर्धन करना हम सभी का कर्तव्य है। उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय भाषाओं को आधुनिक तकनीक से जोड़ना जरूरी है ताकि आने वाली पीढ़ियों तक ज्ञान, साहित्य और संस्कृति का खजाना आसानी से पहुंच सके।

कार्यक्रम में विजेताओं का सम्मान

कार्यक्रम के दौरान पिछले वर्ष आयोजित आइडियाथॉन प्रतियोगिता के विजेताओं को सम्मानित भी किया गया।

इस अवसर पर शदाणी दरबार के पीठाधीश संत श्री युधिष्ठीर लाल जी महाराज, राष्ट्रीय सिंधी भाषा विकास परिषद के प्रोफेसर सुनील बाबूराव कुलकर्णी, रायपुर विधायक पुरंदर मिश्रा, पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर सच्चिदानंद शुक्ला, कुलसचिव डॉ. शैलेन्द्र कुमार पटेल, विश्वविद्यालय के शिक्षक-शिक्षिकाएं, छात्र-छात्राएं और सिंधी समाज के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

Share This Article
Leave a comment