साल 2001 में रिलीज हुई छुपा रुस्तम आज अपनी सिल्वर जुबली मना रही है। 25 साल बाद भी यह फिल्म अपने गानों, कास्टिंग और दिलचस्प किस्सों के कारण बॉलीवुड प्रेमियों के बीच चर्चा में बनी हुई है।
इस फिल्म में संजय कपूर, ममता कुलकर्णी और मनीषा कोइराला की अहम भूमिकाएं थीं, जबकि टीनू आनंद, राज बब्बर और दिलीप ताहिल ने इसे और मजबूत बनाया।
फिल्म की कास्टिंग से जुड़ी कहानी काफी दिलचस्प रही। शुरुआत में बड़े सितारों को इस प्रोजेक्ट के लिए अप्रोच किया गया, लेकिन कई कारणों से बात नहीं बन पाई। आखिरकार संजय कपूर को लीड रोल मिला, जिन्होंने डबल रोल निभाकर फिल्म में अलग पहचान बनाई।
‘छुपा रुस्तम’ की रिलीज भी आसान नहीं रही। करीब पांच साल की देरी के बाद फिल्म सिनेमाघरों में पहुंची। इतनी देरी के बावजूद फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर अच्छा प्रदर्शन कर सबको चौंका दिया। खुद संजय कपूर ने भी इसकी सफलता की उम्मीद कम ही की थी।
फिल्म का संगीत इसकी सबसे बड़ी ताकत साबित हुआ। आनंद-मिलिंद के संगीत और आनंद बख्शी के गीतों ने इसे सुपरहिट बना दिया। ‘ओ बंगला गाड़ी’, ‘तू निकला छुपा रुस्तम’ और ‘ये चांद कोई दीवाना है’ जैसे गाने आज भी पुराने दौर की याद दिलाते हैं और खूब सुने जाते हैं।
इस फिल्म ने संजय कपूर के करियर को नई दिशा दी और उन्हें मुख्य अभिनेता के तौर पर मजबूत पहचान दिलाई।
25 साल बाद भी ‘छुपा रुस्तम’ इस बात का उदाहरण है कि अच्छी कहानी, दमदार संगीत और दिलचस्प बैकस्टोरी किसी फिल्म को लंबे समय तक यादगार बना सकते हैं।

