ट्रांसजेंडर पर्सन्स अमेंडमेंट बिल को लेकर संसद में जारी बहस के बीच समाजवादी पार्टी की सांसद Jaya Bachchan ने सरकार के प्रस्तावित बदलावों पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इस बिल को ट्रांसजेंडर समुदाय के अधिकारों के खिलाफ बताया।
‘अधिकारों पर सीधा प्रहार’
राज्यसभा में अपने संबोधन के दौरान जया बच्चन ने कहा कि यह संशोधन ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के पहचान के अधिकार को सीमित करता है। उन्होंने इसे संवैधानिक मूल्यों और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के खिलाफ बताया।
उन्होंने 2014 के NALSA vs Union of India फैसले का जिक्र करते हुए कहा कि उस ऐतिहासिक निर्णय ने ट्रांसजेंडर समुदाय को आत्म-पहचान का अधिकार दिया था, जिसे अब कमजोर किया जा रहा है।
संसद में प्रतिनिधित्व की मांग उठाई
जया बच्चन ने इस मुद्दे पर एक अहम सुझाव देते हुए कहा कि ट्रांसजेंडर समुदाय को संसद में प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए। इससे उनकी आवाज सीधे नीति-निर्माण तक पहुंच सकेगी।
मेडिकल बोर्ड की प्रक्रिया पर चिंता
उन्होंने बिल में प्रस्तावित मेडिकल बोर्ड के प्रावधानों पर भी सवाल उठाए। उनके अनुसार, ऐसी प्रक्रियाएं ट्रांसजेंडर व्यक्तियों की गरिमा को प्रभावित कर सकती हैं और उन्हें अनावश्यक जांच से गुजरना पड़ सकता है।
भविष्य को लेकर जताई आशंका
जया बच्चन ने कहा कि इस संशोधन के चलते ट्रांस मेन, ट्रांस वुमन और नॉन-बाइनरी व्यक्तियों की कानूनी सुरक्षा सीमित हो सकती है। यह जेंडर पहचान के अधिकारों के लिए एक कदम पीछे जाने जैसा है।
संसद से सड़क तक बढ़ा विरोध
इस बिल को लेकर न सिर्फ संसद में बल्कि देशभर में भी बहस तेज हो गई है। कई सामाजिक संगठनों और अधिकार समूहों ने भी इस प्रस्तावित बदलाव पर चिंता जताई है।

