10 साल बाद खुला पाकिस्तान का डोपिंग काला सच: Court of Arbitration for Sport ने कोच-पूर्व अध्यक्ष को किया लाइफटाइम बैन

CG DARSHAN
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करीब एक दशक बाद पाकिस्तान के खेल जगत से जुड़ा एक चौंकाने वाला डोपिंग कांड सामने आया है, जिसने अंतरराष्ट्रीय खेल समुदाय को हिला कर रख दिया है। Court of Arbitration for Sport (CAS) की एंटी-डोपिंग डिवीजन ने इस मामले में सख्त फैसला सुनाते हुए पाकिस्तान भारोत्तोलन महासंघ के पूर्व अध्यक्ष Hafiz Imran Butt और कोच Irfan Butt पर आजीवन प्रतिबंध लगा दिया है।

जांच में यह खुलासा हुआ कि 2014 से 2016 के बीच दोनों अधिकारियों ने संगठित रूप से खिलाड़ियों को प्रतिबंधित पदार्थ दिए और डोपिंग को बढ़ावा दिया। इस दौरान न केवल सीनियर एथलीट्स बल्कि नाबालिग खिलाड़ियों को भी इस नेटवर्क में शामिल किया गया, जो खेल नियमों का गंभीर उल्लंघन है।

खेल नैतिकता पर बड़ा सवाल

इस घटना ने खेलों में पारदर्शिता और निष्पक्षता को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। CAS के फैसले के अनुसार, अब दोनों आरोपी किसी भी ऐसी गतिविधि में हिस्सा नहीं ले पाएंगे जो विश्व एंटी-डोपिंग कोड के अंतर्गत आती है।

Abubakar Ghani भी दोषी करार

इस मामले में पाकिस्तानी वेटलिफ्टर Abubakar Ghani का नाम भी सामने आया है। 2021 विश्व चैंपियनशिप में डोप टेस्ट फेल होने के बाद उन्हें चार साल के लिए निलंबित कर दिया गया है।

जांच में पाया गया कि उनके सैंपल में प्रतिबंधित पदार्थ मौजूद था और उन्होंने खुद को बचाने के लिए फर्जी दस्तावेज भी पेश किए। इसके चलते उन पर 6 मार्च 2026 से 5 मार्च 2030 तक बैन लागू किया गया है।

International Weightlifting Federation की बढ़ी सख्ती

इस पूरे मामले के बाद International Weightlifting Federation (IWF) ने भी पाकिस्तान भारोत्तोलन महासंघ पर और कड़ी कार्रवाई के संकेत दिए हैं। महासंघ पहले ही निलंबन झेल रहा है और अब नए खुलासों के बाद उसकी स्थिति और खराब हो सकती है।

यह मामला एक बार फिर साफ करता है कि खेलों में निष्पक्षता बनाए रखने के लिए सख्त एंटी-डोपिंग नियम और उनकी कड़ाई से निगरानी बेहद जरूरी है।

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