महाराष्ट्र के नासिक स्थित Tata Consultancy Services (TCS) की बीपीओ यूनिट में सामने आए यौन उत्पीड़न और कथित जबरन धर्मांतरण के मामले ने अब और गंभीर रूप ले लिया है। इस प्रकरण की मुख्य आरोपी निदा खान, जो फिलहाल फरार है, ने अग्रिम जमानत के लिए अदालत का रुख किया है। उसके परिवार ने दावा किया है कि वह मुंबई में है और गर्भवती है, हालांकि जांच एजेंसियां इन दावों की आधिकारिक पुष्टि में जुटी हैं।
विशेष जांच दल (SIT) लगातार छापेमारी कर आरोपी की तलाश कर रहा है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आरोपी द्वारा दी गई मेडिकल जानकारी की सत्यता की जांच की जाएगी। इस बीच, कंपनी ने कड़ी कार्रवाई करते हुए निदा खान को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है और उसके सभी सिस्टम एक्सेस समाप्त कर दिए हैं।
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री Devendra Fadnavis ने इसे एक गंभीर और सुनियोजित साजिश बताया है। उनके अनुसार, प्रारंभिक जांच में यह संकेत मिले हैं कि यह घटनाएं किसी संगठित पैटर्न के तहत हो रही थीं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस केस की जानकारी केंद्रीय एजेंसियों को दे दी गई है।
जांच में सामने आए तथ्यों के अनुसार, अब तक नौ शिकायतों के आधार पर मामला दर्ज किया गया है। पीड़ित महिला कर्मचारियों ने आरोप लगाया है कि 2022 से 2026 के बीच उन्हें लगातार मानसिक और यौन उत्पीड़न का सामना करना पड़ा। इसके साथ ही कुछ मामलों में कर्मचारियों को धार्मिक गतिविधियों के लिए दबाव डाले जाने की बात भी सामने आई है, जिससे केस और गंभीर हो गया है।
पुलिस अब तक सात आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है, जिनमें एक महिला एचआर अधिकारी भी शामिल है। पीड़ितों का आरोप है कि उन्होंने कंपनी प्रबंधन से शिकायत की थी, लेकिन समय पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। वहीं Tata Sons के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन ने इस पूरे मामले को बेहद चिंताजनक बताया है और सख्त जांच का भरोसा दिलाया है। कंपनी की COO आरती सुब्रमण्यम के नेतृत्व में आंतरिक जांच भी जारी है।
यह मामला अब केवल एक कॉर्पोरेट विवाद नहीं रह गया है, बल्कि कार्यस्थल पर सुरक्षा, जवाबदेही और नैतिकता से जुड़े बड़े सवाल खड़े कर रहा है। फिलहाल जांच एजेंसियां हर पहलू की गहराई से पड़ताल कर रही हैं और फरार आरोपियों की तलाश जारी है।

