तुर्किये के इस्तांबुल में Salim Dola की गिरफ्तारी ने अंतरराष्ट्रीय ड्रग और अंडरवर्ल्ड नेटवर्क को बड़ा झटका दिया है। Dawood Ibrahim के करीबी माने जाने वाले डोला पर करीब 5,000 करोड़ रुपये के ड्रग कारोबार और आतंकी फंडिंग से जुड़े होने के आरोप हैं।
सूत्रों के अनुसार, यह गिरफ्तारी एक संयुक्त अंतरराष्ट्रीय ऑपरेशन के तहत की गई, जिसमें तुर्किये की सुरक्षा एजेंसियों ने अहम भूमिका निभाई। इस कार्रवाई को वैश्विक स्तर पर सक्रिय ड्रग सिंडिकेट और उसके फाइनेंसिंग चैनल पर बड़ा हमला माना जा रहा है।
भारतीय एजेंसियां अब डोला को देश लाने की रणनीति पर काम कर रही हैं। बताया जा रहा है कि उसे संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के जरिए प्रत्यर्पित किया जा सकता है, क्योंकि भारत और तुर्किये के बीच प्रत्यक्ष प्रत्यर्पण संधि नहीं है। डोला को इंटरपोल की रेड कॉर्नर नोटिस के आधार पर गिरफ्तार किया गया, जो भारत की एजेंसियों के अनुरोध पर जारी हुई थी।
जांच में सामने आया है कि यह नेटवर्क मुंबई, गुजरात और दिल्ली सहित कई शहरों में फैला हुआ था। ड्रग तस्करी से अर्जित धन का उपयोग कथित तौर पर आतंकी संगठनों और विदेशी एजेंसियों तक फंडिंग पहुंचाने में किया जाता था। इससे सुरक्षा एजेंसियों को लंबे समय से चिंता बनी हुई थी।
गौरतलब है कि इस नेटवर्क पर पहले भी कार्रवाई हो चुकी है। डोला के बेटे ताहिर डोला को यूएई से गिरफ्तार कर भारत लाया गया था, जबकि उसके सहयोगी सलीम शेख को भी दुबई से प्रत्यर्पित किया जा चुका है।
मुंबई में जन्मा डोला शुरुआत में छोटे स्तर पर नशीले पदार्थों का कारोबार करता था, लेकिन धीरे-धीरे उसने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फैला एक बड़ा ड्रग नेटवर्क खड़ा कर लिया। अब उसकी गिरफ्तारी के बाद एजेंसियां उससे पूछताछ कर पूरे नेटवर्क, फंडिंग चैन और विदेशी कनेक्शन का खुलासा करने में जुटी हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कार्रवाई न केवल ड्रग तस्करी के खिलाफ बड़ी सफलता है, बल्कि आतंकवादी फंडिंग के स्रोतों को खत्म करने की दिशा में भी एक निर्णायक कदम साबित हो सकती है।

