तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के नतीजों ने राज्य की राजनीति में बड़ा बदलाव ला दिया है। चुनाव में करारी हार के बाद मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। इस कदम के साथ ही राज्य में नई सरकार के गठन की प्रक्रिया तेज होने की उम्मीद है।
234 सीटों वाली विधानसभा में सत्ताधारी द्रमुक (DMK) का प्रदर्शन उम्मीदों के विपरीत रहा और पार्टी सिर्फ 59 सीटों पर सिमट गई। वहीं, अभिनेता से नेता बने विजय की पार्टी TVK ने अपने पहले ही चुनाव में 107 सीटें जीतकर बड़ा राजनीतिक उलटफेर कर दिया।
चुनाव में हार के बाद स्टालिन ने राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर को अपना इस्तीफा सौंपते हुए लोकतांत्रिक परंपराओं का पालन किया। उन्होंने जनता के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि चुनाव परिणाम भले ही उनके पक्ष में नहीं रहे, लेकिन उन्हें मिले हर वोट में जनता का भरोसा झलकता है।
स्टालिन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर साझा किए गए आंकड़ों में बताया कि द्रमुक गठबंधन को 1.54 करोड़ से अधिक वोट मिले हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि जीत का अंतर महज कुछ प्रतिशत का रहा, जो भविष्य में राजनीतिक वापसी की संभावना को दर्शाता है।
उन्होंने अपने कार्यकर्ताओं से निराश न होने की अपील करते हुए कहा कि द्रमुक अब एक मजबूत विपक्ष की भूमिका निभाएगी। स्टालिन ने भरोसा दिलाया कि उनकी पार्टी जनता के मुद्दों को लेकर लगातार आवाज उठाती रहेगी और सरकार को जवाबदेह बनाएगी।
इस चुनाव का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह रहा कि खुद स्टालिन अपनी पारंपरिक कोलाथुर सीट भी नहीं बचा सके। TVK उम्मीदवार ने उन्हें 8,795 वोटों से हराकर बड़ा राजनीतिक संदेश दिया। वोट शेयर में भी TVK ने 32% से अधिक समर्थन हासिल कर बढ़त बनाई, जबकि DMK और अन्य दल पीछे रह गए।
तमिलनाडु में यह चुनाव परिणाम संकेत देता है कि राज्य की राजनीति में अब नए समीकरण बन रहे हैं और पारंपरिक दलों को नई चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।

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