Pati Patni Aur Woh Do Review: कैसी है नई फिल्म?

CG DARSHAN
CG DARSHAN 3 Min Read
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Pati Patni Aur Woh Do के साथ Ayushmann Khurrana एक बार फिर छोटे शहर की कॉमेडी लेकर आए हैं। फिल्म में उनके साथ Sara Ali Khan, Wamiqa Gabbi और Rakul Preet Singh नजर आती हैं। हालांकि Pati Patni Aur Woh Do Review देखने के बाद यह साफ महसूस होता है कि फिल्म बार-बार पुराने बॉलीवुड फॉर्मूले पर ही निर्भर करती है।

कहानी में नया कम, गलतफहमियां ज्यादा

फिल्म की कहानी प्रयागराज के फॉरेस्ट ऑफिसर प्रजापति पांडे के इर्द-गिर्द घूमती है। उनकी शादीशुदा जिंदगी ठीक चल रही होती है, लेकिन कॉलेज फ्रेंड चंचल की वापसी के बाद कहानी में गलतफहमियों का सिलसिला शुरू हो जाता है। कोई आधी बात सुनता है, कोई गलत मतलब निकालता है और फिर रिश्तों में कन्फ्यूजन बढ़ता जाता है। Pati Patni Aur Woh Do Review में कहानी की सबसे बड़ी कमी यही लगती है कि फिल्म बहुत जल्दी प्रेडिक्टेबल हो जाती है।

आयुष्मान की कॉमिक टाइमिंग बचाती है फिल्म

आयुष्मान खुराना अपनी कॉमिक टाइमिंग से कई जगह फिल्म को संभालने की कोशिश करते हैं। हालांकि उनके एक्सप्रेशंस और अंदाज में ज्यादा नया पन नजर नहीं आता। वामिका गब्बी ने अपने किरदार को काफी अच्छे तरीके से निभाया है और उनके सीन प्रभाव छोड़ते हैं। वहीं सारा अली खान कुछ जगह जरूरत से ज्यादा एनर्जेटिक दिखाई देती हैं। Pati Patni Aur Woh Do Review में रकुल प्रीत सिंह का किरदार भी सीमित नजर आता है और उन्हें कहानी में ज्यादा गहराई नहीं दी गई।

स्क्रीनप्ले बना फिल्म की कमजोरी

फिल्म का निर्देशन Mudassar Aziz ने किया है। उन्होंने देसी फ्लेवर और छोटे शहर की कॉमेडी दिखाने की कोशिश की, लेकिन स्क्रीनप्ले कई जगह कमजोर पड़ जाता है। फिल्म में बार-बार एक जैसी गलतफहमियां दिखाई जाती हैं, जिससे कहानी दोहराव महसूस कराने लगती है। Pati Patni Aur Woh Do Review में कई कॉमिक सीन ऐसे लगते हैं जिन्हें जबरदस्ती मजेदार बनाने की कोशिश की गई हो।

देखें या छोड़ दें?

अगर आप हल्की-फुल्की कॉमेडी फिल्में पसंद करते हैं और आयुष्मान खुराना के फैन हैं, तो यह फिल्म एक बार देखी जा सकती है। लेकिन अगर आप नई कहानी और स्मार्ट कॉमेडी की उम्मीद लेकर जाएंगे, तो फिल्म थोड़ा निराश कर सकती है। Pati Patni Aur Woh Do Review यही बताता है कि फिल्म कुछ जगह मनोरंजन करती है, लेकिन पूरी तरह यादगार बनने में पीछे रह जाती है।

कुल मिलाकर फिल्म पुराने बॉलीवुड कन्फ्यूजन ड्रामे को नए अंदाज में पेश करने की कोशिश करती है, लेकिन कहानी और स्क्रीनप्ले इसकी रफ्तार कमजोर कर देते हैं।

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