छत्तीसगढ़ के चर्चित DMF घोटाला मामला में बड़ा फैसला सामने आया है। पूर्व आईएएस अधिकारी अनिल टूटेजा को राहत मिली है। दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें सशर्त जमानत दी है। हालांकि, इससे पहले हाई कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी थी।
हाई कोर्ट ने पहले खारिज की थी याचिका
हाई कोर्ट ने मामले को गंभीर आर्थिक अपराध माना था। अदालत ने कई साक्ष्यों का उल्लेख भी किया। इसके अलावा, व्हाट्सएप चैट और केस डायरी का हवाला दिया गया। साथ ही सह-आरोपियों के बयान भी अदालत में पेश हुए। नतीजतन, हाई कोर्ट ने जमानत देने से इनकार कर दिया। वहीं अदालत ने जांच प्रभावित होने की आशंका जताई थी।
जांच एजेंसियों ने लगाए गंभीर आरोप
जांच एजेंसियों के अनुसार, DMF घोटाला मामला विकास निधि से जुड़ा है। यह राशि खनन प्रभावित क्षेत्रों के लिए निर्धारित थी। आरोप है कि निविदाओं में अनियमितताएं की गईं। खासतौर पर कुछ निजी फर्मों को फायदा पहुंचाया गया।स्मार्ट क्लास और जल शोधन परियोजनाएं जांच के दायरे में हैं। इसके अलावा फर्नीचर आपूर्ति को लेकर भी सवाल उठे हैं। वहीं दूसरी ओर, करोड़ों रुपये की अवैध वसूली का दावा किया गया। इसलिए मामले को संगठित भ्रष्टाचार से जोड़ा जा रहा है।
सुप्रीम कोर्ट ने किन शर्तों पर दी जमानत?
अनिल टूटेजा ने हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती दी थी। इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की पीठ ने सुनवाई की। इसी बीच अदालत ने सशर्त जमानत मंजूर कर ली। हालांकि, कोर्ट ने कई शर्तें भी लगाई हैं।
टूटेजा को छत्तीसगढ़ से बाहर रहना होगा। साथ ही उन्हें अपने ठहरने की जानकारी देनी होगी। हर सुनवाई में उपस्थित रहना भी अनिवार्य रहेगा।
DMF फंड के उपयोग पर उठे सवाल
जांच एजेंसियों का कहना है कि DMF घोटाला मामला सार्वजनिक धन से जुड़ा है। दरअसल, यह फंड विकास कार्यों के लिए बनाया गया था। आरोप है कि प्रभाव का इस्तेमाल कर ठेके दिलाए गए। इसके अलावा कई परियोजनाओं में नियमों की अनदेखी हुई। कुल मिलाकर, जांच एजेंसियां आर्थिक लेनदेन की जांच कर रही हैं। साथ ही डिजिटल साक्ष्यों की भी पड़ताल जारी है।
मामले में आगे क्या हो सकता है?
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अंतिम फैसला ट्रायल में होगा। हालांकि, फिलहाल DMF घोटाला मामला चर्चा में बना हुआ है। वहीं राजनीतिक गलियारों में भी इस फैसले की चर्चा तेज है। नतीजतन, आने वाले दिनों में जांच और अहम हो सकती है।

