भारतीय ग्रीको रोमन पहलवान Vikrant Singh को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। Vikrant Singh Doping मामले में खुलासा हुआ है कि अस्थायी प्रतिबंध के बावजूद वह नेशनल कैंप में शामिल रहे।
लखनऊ में चल रहे राष्ट्रीय शिविर में उनकी मौजूदगी ने भारतीय कुश्ती प्रशासन पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
एशियाई चैंपियनशिप ट्रायल में भी लिया हिस्सा
जानकारी के अनुसार Vikrant Singh Doping विवाद के दौरान उन्होंने वियतनाम में होने वाली अंडर-23 एशियाई चैंपियनशिप के ट्रायल में भी भाग लिया।
हालांकि ट्रायल में हार के बाद वह कैंप में वापस नहीं लौटे। खेल नियमों के मुताबिक किसी खिलाड़ी पर अस्थायी प्रतिबंध लगने के बाद वह किसी भी आधिकारिक खेल गतिविधि में हिस्सा नहीं ले सकता।
तीन प्रतिबंधित पदार्थ पाए गए
National Anti Doping Agency की जांच में विक्रांत सिंह के सैंपल में तीन प्रतिबंधित पदार्थ पाए गए। Vikrant Singh Doping मामले में स्टेनोजोलॉल, टैमोक्सीफेन और लैट्रोजोल जैसे पदार्थ मिलने की पुष्टि हुई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि एक से अधिक प्रतिबंधित पदार्थ मिलने पर खिलाड़ी को लंबा बैन झेलना पड़ सकता है।
WFI ने दी अपनी सफाई
Wrestling Federation of India ने इस मामले में कहा कि उन्हें समय पर जानकारी नहीं मिली थी। अगर सूचना पहले मिल जाती, तो खिलाड़ी को तुरंत कैंप से हटा दिया जाता।
Vikrant Singh Doping केस में यह भी सामने आया कि खिलाड़ी ने नाडा के नोटिस का जवाब नहीं दिया और बी सैंपल टेस्ट की मांग भी नहीं की।
भारतीय कुश्ती की छवि पर असर
Vikrant Singh Doping विवाद ने भारतीय कुश्ती की छवि को नुकसान पहुंचाया है। खेल विशेषज्ञों का कहना है कि डोपिंग मामलों में पारदर्शिता और तेज कार्रवाई बेहद जरूरी है।
अब सभी की नजर नाडा की अंतिम कार्रवाई और संभावित प्रतिबंध पर टिकी हुई है।

