मोदी सरकार 12 वर्ष: जनजातीय सम्मान और सशक्तिकरण का स्वर्णकाल

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मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में जनजातीय सशक्तिकरण को नई दिशा मिली है। भारत मंडपम में आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि पिछले 12 वर्षों में आदिवासी समाज के सम्मान और विकास के लिए कई ऐतिहासिक निर्णय लिए गए हैं। इन पहलों ने देश के करोड़ों जनजातीय नागरिकों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का कार्य किया है।

जनजातीय गौरव दिवस जैसी पहलें बनीं प्रेरणा

मुख्यमंत्री ने कहा कि जनजातीय सशक्तिकरण के लिए भगवान बिरसा मुंडा की जयंती को जनजातीय गौरव दिवस के रूप में मनाने का निर्णय ऐतिहासिक रहा है। इसके अलावा धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान ने दूरस्थ क्षेत्रों में विकास कार्यों को नई गति दी है। इन योजनाओं ने आदिवासी समाज को अपनी संस्कृति और पहचान पर गर्व करने का अवसर प्रदान किया है।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु बनीं सम्मान का प्रतीक

साय ने कहा कि जनजातीय सशक्तिकरण की दिशा में सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक द्रौपदी मुर्मु का राष्ट्रपति बनना है। यह देश के जनजातीय समाज के लिए सम्मान और स्वाभिमान का प्रतीक है। इससे देशभर के आदिवासी समुदायों में आत्मविश्वास और नई ऊर्जा का संचार हुआ है।

योजनाओं से दूरस्थ क्षेत्रों तक पहुंचा विकास

मुख्यमंत्री ने बताया कि जनजातीय सशक्तिकरण के तहत पीएम जनमन योजना और अन्य योजनाओं के माध्यम से दूरस्थ गांवों तक सड़क, बिजली, पेयजल और आवास जैसी सुविधाएं पहुंचाई जा रही हैं। इन योजनाओं ने आदिवासी क्षेत्रों में जीवन की गुणवत्ता सुधारने और विकास की नई संभावनाएं पैदा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

विकास यात्रा में बने सक्रिय सहभागी

मुख्यमंत्री ने कहा कि जनजातीय सशक्तिकरण का उद्देश्य आदिवासी समाज को केवल लाभार्थी बनाना नहीं बल्कि विकास यात्रा का सक्रिय भागीदार बनाना है। पेसा कानून, लघु वनोपज खरीदी और कृषक उन्नति योजना जैसी पहलें इसी सोच का परिणाम हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले समय में जनजातीय समाज देश के विकास में और बड़ी भूमिका निभाएगा।

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