ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव का असर अब भारतीय नागरिकों पर भी दिखाई देने लगा है। होर्मुज जलडमरूमध्य के पास हुए एक जहाज हमले में तीन भारतीयों के मारे जाने की पुष्टि ने पूरे देश को झकझोर दिया है। भारतीय नाविकों की मौत की इस घटना ने समुद्री सुरक्षा और युद्धग्रस्त क्षेत्रों में नागरिक जहाजों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
ओमान के तट के पास हुआ हमला
पलाऊ के झंडे वाले एमटी सेट्टेबेलो टैंकर पर हमला उस समय हुआ जब जहाज ओमान के निकट समुद्री मार्ग से गुजर रहा था। जहाज पर भारतीय चालक दल के 24 सदस्य मौजूद थे।
तीन राज्यों से थे मृतक नाविक
मृतकों में उत्तर प्रदेश के शिवानंद चौरसिया, हिमाचल प्रदेश के आदित्य शर्मा और आंध्र प्रदेश के एक अन्य नाविक शामिल बताए जा रहे हैं। भारतीय नाविकों की मौत की खबर मिलते ही संबंधित राज्यों में शोक की लहर फैल गई।
केंद्र सरकार ने क्या कदम उठाए?
घटना के बाद विदेश मंत्रालय और ओमान स्थित भारतीय दूतावास लगातार हालात पर नजर बनाए हुए हैं। सरकार ने स्थानीय प्रशासन के साथ समन्वय बढ़ाकर राहत और बचाव कार्यों को प्राथमिकता दी है।
पार्थिव शरीर लाने की तैयारी
केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने कहा है कि सरकार मृतकों के पार्थिव शरीर को भारत लाने और जीवित बचे चालक दल की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है।
परिवारों ने उठाए कई सवाल
मृतक नाविकों के परिजनों ने घटना की निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि संघर्ष क्षेत्र में जहाज के संचालन को लेकर स्पष्ट जवाब मिलने चाहिए।
जहाज संचालन पर सवाल
परिवारों का मानना है कि युद्ध जैसी स्थिति के बीच जहाज को आगे बढ़ाने का निर्णय कैसे लिया गया, इसकी जांच जरूरी है। भारतीय नाविकों की मौत के बाद सुरक्षा प्रोटोकॉल पर भी बहस तेज हो गई है।
होर्मुज जलडमरूमध्य क्यों है महत्वपूर्ण?
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में शामिल है। यहां से बड़ी मात्रा में तेल और गैस की आपूर्ति होती है।
बढ़ते तनाव का वैश्विक असर
ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के कारण इस क्षेत्र में जहाजों की आवाजाही जोखिमपूर्ण हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे हालात वैश्विक व्यापार और ऊर्जा बाजारों को प्रभावित कर सकते हैं।
जांच और जवाबदेही की मांग
नाविक संगठनों ने भी घटना की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जांच कराने की मांग की है। कुछ संगठनों का दावा है कि क्षेत्र में सक्रिय सैन्य बलों को जहाजों और उनके चालक दल की जानकारी पहले से होती है।
पारदर्शी जांच से ही मिलेगा जवाब
विशेषज्ञों का कहना है कि भारतीय नाविकों की मौत के कारणों का पता लगाने के लिए निष्पक्ष और पारदर्शी जांच जरूरी है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।

