जल संरक्षण और आधुनिक कृषि से जशपुर बना राष्ट्रीय मॉडल

CG DARSHAN
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प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना के तहत जशपुर जिले में जल संरक्षण को कृषि विकास की आधारशिला बनाया गया है। केंद्र सरकार ने जिले में चल रहे जल संवर्धन और कृषि सुधार कार्यक्रमों की सराहना की है। अधिकारियों का मानना है कि खेती की दीर्घकालिक सफलता के लिए जल संसाधनों का संरक्षण और प्रभावी प्रबंधन अत्यंत आवश्यक है।

विभिन्न विभागों के समन्वय से हो रहे कार्य

जिले में जल संरक्षण के लिए कृषि, ग्रामीण विकास, उद्यानिकी और जल संसाधन विभाग मिलकर कार्य कर रहे हैं। जल संचय जनभागीदारी अभियान के तहत कई योजनाएं संचालित की जा रही हैं। इन प्रयासों का उद्देश्य सिंचाई सुविधाओं को मजबूत बनाना और किसानों को जल संकट से राहत दिलाना है।

आधुनिक तकनीकों से बढ़ेगी उत्पादकता

प्रशासन ने जल संरक्षण के साथ-साथ आधुनिक कृषि तकनीकों को भी प्राथमिकता दी है। ड्रोन सेवाएं, कस्टम हायरिंग सेंटर और सामुदायिक बीज बैंक जैसी सुविधाएं किसानों को उपलब्ध कराई जा रही हैं। इससे खेती अधिक वैज्ञानिक और लाभकारी बनेगी तथा किसानों को नई तकनीकों का सीधा लाभ मिलेगा।

मौसमीय चुनौतियों से निपटने की तैयारी

संभावित एल-नीनो परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए जल संरक्षण आधारित कृषि रणनीति तैयार की गई है। अल्प अवधि वाली धान किस्मों के साथ मोटे अनाज, दलहन और तिलहन की खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है। इससे मौसम की अनिश्चितताओं के बावजूद उत्पादन को स्थिर बनाए रखने में मदद मिलेगी।

राष्ट्रीय स्तर पर बढ़ी जशपुर की पहचान

केंद्र सरकार ने माना है कि जल संरक्षण और कृषि नवाचार के क्षेत्र में जशपुर की पहल अन्य जिलों के लिए भी प्रेरणादायक है। किसानों की आय बढ़ाने, प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने और कृषि आधारित उद्यमिता विकसित करने के प्रयासों ने जिले को राष्ट्रीय पहचान दिलाई है। आने वाले वर्षों में यह मॉडल और भी प्रभावी परिणाम दे सकता है।

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