आर्द्रभूमि संरक्षण के लिए समुदाय आधारित प्रबंधन मॉडल को बढ़ावा

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रायपुर में आयोजित राज्य स्तरीय परामर्श कार्यक्रम में यह बात उभरकर सामने आई कि सामुदायिक प्रबंधन के बिना आर्द्रभूमियों का संरक्षण संभव नहीं है। विभिन्न ग्राम पंचायतों के प्रतिनिधियों ने बताया कि गांवों में जागरूकता बढ़ने के बाद संरक्षण संबंधी नियम बनाए जा रहे हैं और स्थानीय स्तर पर लोगों की भागीदारी लगातार बढ़ रही है।

पंचायतों को सशक्त बनाने पर जोर

विशेषज्ञों ने कहा कि सामुदायिक प्रबंधन को प्रभावी बनाने के लिए ग्राम पंचायतों और जैव विविधता प्रबंधन समितियों को अधिक अधिकार और संसाधन उपलब्ध कराने की जरूरत है। इससे स्थानीय स्तर पर संरक्षण गतिविधियों की निगरानी और क्रियान्वयन बेहतर तरीके से किया जा सकेगा।

महिलाओं और युवाओं को मिले नेतृत्व का अवसर

बैठक में सुझाव दिया गया कि सामुदायिक प्रबंधन मॉडल में महिलाओं और युवाओं को नेतृत्वकारी भूमिका दी जानी चाहिए। स्वयं सहायता समूहों और युवा संगठनों की भागीदारी से संरक्षण अभियानों को नई ऊर्जा मिलेगी और स्थानीय स्तर पर स्थायी परिणाम हासिल किए जा सकेंगे।

आजीविका और संरक्षण को जोड़ा जाएगा

विशेषज्ञों का मानना है कि सामुदायिक प्रबंधन को सफल बनाने के लिए संरक्षण गतिविधियों को स्थानीय आजीविका से जोड़ना जरूरी है। आर्द्रभूमि आधारित रोजगार और आर्थिक गतिविधियां विकसित होने से लोग संरक्षण कार्यों में अधिक रुचि लेंगे और संसाधनों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी।

सतत विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम

परामर्श कार्यक्रम में यह सहमति बनी कि सामुदायिक प्रबंधन आधारित संरक्षण मॉडल राज्य में जल, जैव विविधता और पर्यावरण सुरक्षा को नई दिशा देगा। इसके लिए नियमित संवाद, प्रशिक्षण और जागरूकता कार्यक्रमों को बढ़ावा देने का निर्णय लिया गया ताकि संरक्षण प्रयासों को दीर्घकालिक सफलता मिल सके।

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