छत्तीसगढ़ विधानसभा के पावस सत्र में पंडवानी कलाकार तीजन बाई को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने उनके निधन को राज्य की सांस्कृतिक क्षति बताया। उन्होंने कहा कि तीजन बाई ने अपनी कला से छत्तीसगढ़ को वैश्विक पहचान दिलाई। साथ ही उन्होंने उनके प्रेरणादायी जीवन को भी याद किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि लोकसंस्कृति के संरक्षण में उनका योगदान हमेशा स्मरणीय रहेगा। इसलिए नई पीढ़ी को उनके जीवन से सीख लेनी चाहिए।
मुख्य बातें
- विधानसभा में तीजन बाई को श्रद्धांजलि दी गई।
- मुख्यमंत्री ने सांस्कृतिक योगदान को सराहा।
- पंडवानी कला को वैश्विक पहचान दिलाने का उल्लेख किया।
- पद्म विभूषण सहित कई सम्मान याद किए गए।
- नई पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत बताया गया।
पंडवानी कलाकार ने विश्व मंच पर बढ़ाया छत्तीसगढ़ का सम्मान
मुख्यमंत्री ने कहा कि पंडवानी कलाकार तीजन बाई ने कापालिक शैली को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। उन्होंने एशिया और यूरोप सहित कई देशों में अपनी प्रस्तुतियाँ दीं। वहीं उनकी अभिनय शैली और प्रभावशाली वाणी ने लाखों लोगों को प्रभावित किया।
उन्होंने सामाजिक चुनौतियों के बीच अपनी अलग पहचान बनाई। इसके अलावा उन्होंने महिला कलाकारों के लिए भी नई राह तैयार की। उनका जीवन संघर्ष, साधना और समर्पण का उदाहरण माना जाता है।
सम्मानों से सजी रही उपलब्धियों की यात्रा
मुख्यमंत्री ने बताया कि तीजन बाई को पद्मश्री, पद्म भूषण और संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार जैसे सम्मान मिले। वर्ष 2019 में उन्हें पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया। वह यह सम्मान पाने वाली छत्तीसगढ़ की पहली विभूति थीं।
कई विश्वविद्यालयों ने उन्हें मानद डी.लिट्. उपाधि भी प्रदान की। पंडवानी कलाकार के रूप में उन्होंने भारतीय लोककला को नई पहचान दिलाई। वहीं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी उनके योगदान को याद किया। कुल मिलाकर उनकी विरासत आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी।
मुख्यमंत्री ने सदन की ओर से उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि दी। साथ ही शोक संतप्त परिवार और कला जगत के प्रति संवेदना व्यक्त की।

