देश की शिक्षा व्यवस्था को लेकर परीक्षा सुधार की मांग एक बार फिर चर्चा में है। जंतर-मंतर पर सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक लगातार भूख हड़ताल कर रहे हैं। उनका कहना है कि पेपर लीक जैसी घटनाएं केवल छात्रों का भविष्य प्रभावित नहीं करतीं, बल्कि पूरे देश की संस्थागत व्यवस्था पर सवाल खड़े करती हैं।
उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित किए बिना युवाओं का भरोसा बहाल नहीं किया जा सकता। इसलिए सरकार को इस विषय पर गंभीर पहल करनी चाहिए।
परीक्षा सुधार की मांग के पीछे क्या हैं प्रमुख मुद्दे?
सोनम वांगचुक का कहना है कि किसी मंत्री का इस्तीफा अंतिम समाधान नहीं है। हालांकि, इससे जवाबदेही तय करने की प्रक्रिया शुरू हो सकती है। उनके अनुसार, सरकार को ऐसी व्यवस्था बनानी चाहिए जिससे भविष्य में प्रश्नपत्र लीक जैसी घटनाएं दोबारा न हों।
उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि संसद के मानसून सत्र में शिक्षा सुधार पर विस्तार से चर्चा हो। साथ ही शिक्षाविदों, छात्रों और विशेषज्ञों को नीति निर्माण में शामिल किया जाए।
शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता पर उठाए सवाल
वांगचुक ने कहा कि यदि परीक्षा प्रणाली निष्पक्ष नहीं होगी, तो योग्य उम्मीदवारों का चयन प्रभावित होगा। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि नकल के सहारे बनने वाले डॉक्टर और इंजीनियर समाज के लिए गंभीर जोखिम पैदा कर सकते हैं। इसलिए शिक्षा में ईमानदारी और गुणवत्ता को सर्वोच्च प्राथमिकता मिलनी चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि विकसित भारत का लक्ष्य तभी पूरा होगा, जब शिक्षा व्यवस्था भरोसेमंद और पारदर्शी होगी।
परीक्षा सुधार की मांग के साथ पीएम मोदी से संवाद की अपील
वांगचुक ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अपील की कि वे छात्रों और नागरिकों की आवाज सुनें। उनके अनुसार, लोकतंत्र में संवाद और सहानुभूति से ही स्थायी समाधान निकलते हैं। उन्होंने कहा कि सरकार यदि युवाओं के सुझावों को महत्व देगी, तो सुधारों को प्रभावी ढंग से लागू किया जा सकेगा।
आंदोलन को मिला जनसमर्थन, विपक्ष से भी सहयोग की उम्मीद
वांगचुक ने बताया कि प्रतिदिन हजारों लोग जंतर-मंतर पहुंचकर आंदोलन का समर्थन कर रहे हैं। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से भी इस मुद्दे पर एकजुट होने की अपील की। उनका कहना है कि शिक्षा सुधार किसी एक दल का नहीं, बल्कि पूरे देश के भविष्य का विषय है।
एक नजर
- जंतर-मंतर पर भूख हड़ताल जारी।
- परीक्षा प्रणाली में जवाबदेही तय करने की मांग।
- संसद में शिक्षा सुधार पर चर्चा की अपील।
- प्रधानमंत्री से संवाद का आग्रह।
- छात्रों और विशेषज्ञों को सुधार प्रक्रिया में शामिल करने की मांग।

