विवेक ओबेरॉय बयान उस समय चर्चा में आ गया, जब उनसे दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे सोनम वांगचुक के अनशन को लेकर सवाल पूछा गया। अभिनेता ने इस मुद्दे पर किसी राजनीतिक टिप्पणी से बचते हुए कहा कि वह राजनीति नहीं, बल्कि अभिनय की दुनिया से जुड़े हैं। उन्होंने खुद को एक ऑब्जर्वर बताया, जो समाज में हो रही घटनाओं से सीखने की कोशिश करता है।
मीडिया से बातचीत में विवेक ओबेरॉय ने कहा, “मैं अभिनेता हूं, नेता नहीं हूं। मैं राजनीतिक चीजों पर ध्यान नहीं देता। हम सिर्फ ऑब्जर्व करते हैं और जीवन में बहुत कुछ सीखते हैं।”
लोकतंत्र पर अभिनेता ने क्या कहा?
रिपोर्टर ने जब उनसे पूछा कि उन्होंने इस प्रदर्शन से क्या सीखा, तब विवेक ओबेरॉय ने लोकतंत्र को लेकर अपनी सोच साझा की।
उन्होंने कहा कि स्वस्थ लोकतंत्र में हर व्यक्ति को अपनी बात रखने का अधिकार होना चाहिए। अलग-अलग विचारों का सामने आना लोकतांत्रिक व्यवस्था की मजबूती का संकेत है।
विवेक ओबेरॉय बयान में लोकतांत्रिक सोच दिखी
विवेक ओबेरॉय बयान में अभिनेता ने कहा कि यदि लोग अपनी आवाज लोकतांत्रिक तरीके से रखते हैं, तो यह सकारात्मक बात है। हालांकि उन्होंने सोनम वांगचुक की मांगों पर कोई सीधी टिप्पणी नहीं की।
उनका यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया है। कई यूजर्स ने उनके जवाब को संतुलित बताया, जबकि कुछ लोगों ने इसे राजनीतिक मुद्दे से दूरी बनाने की कोशिश माना।
28 जून से अनशन पर हैं सोनम वांगचुक
पर्यावरण कार्यकर्ता और शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक 28 जून से दिल्ली के जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल कर रहे हैं। लगातार अनशन के कारण उनकी तबीयत पर असर पड़ने की खबरें सामने आई हैं।
वांगचुक का कहना है कि शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही सुनिश्चित होने तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। उनकी सेहत को लेकर कई सामाजिक संगठनों और सार्वजनिक हस्तियों ने चिंता भी जताई है।
कौन हैं सोनम वांगचुक?
सोनम वांगचुक लद्दाख के प्रसिद्ध इंजीनियर, नवाचार विशेषज्ञ और शिक्षा सुधारक हैं। उन्हें ‘आइस स्तूप’ परियोजना के लिए अंतरराष्ट्रीय पहचान मिली। वह रेमन मैगसेसे पुरस्कार से भी सम्मानित हो चुके हैं।
पिछले कई वर्षों से वह शिक्षा सुधार, पर्यावरण संरक्षण और हिमालयी क्षेत्रों के विकास से जुड़े मुद्दों पर सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।
सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो
विवेक ओबेरॉय बयान सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर बहस तेज हो गई है। कुछ लोगों ने अभिनेता के जवाब की सराहना की। वहीं कुछ यूजर्स का मानना है कि सार्वजनिक हस्तियों को ऐसे मुद्दों पर स्पष्ट राय रखनी चाहिए।
फिलहाल अभिनेता की प्रतिक्रिया और सोनम वांगचुक का आंदोलन दोनों ही राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बने हुए हैं।
निष्कर्ष
विवेक ओबेरॉय बयान ने एक बार फिर सोनम वांगचुक के आंदोलन को सुर्खियों में ला दिया है। अभिनेता ने राजनीतिक टिप्पणी से दूरी रखते हुए लोकतंत्र में हर आवाज के सम्मान की बात कही। दूसरी ओर, सोनम वांगचुक का अनशन अभी भी जारी है और उनकी सेहत को लेकर चिंता बनी हुई है।
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