संबलपुरी साड़ियां तैयार करने वाली धमतरी जिले के ग्राम नारी की महिलाएं आज आत्मनिर्भरता की नई मिसाल बन चुकी हैं। सरकारी योजनाओं, आधुनिक प्रशिक्षण और बाजार तक बेहतर पहुंच ने उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव लाया है। इससे उत्पादन बढ़ा और रोजगार के नए अवसर भी विकसित हुए हैं।
मुख्य बातें
- ग्राम नारी में संबलपुरी साड़ियों का उत्पादन बढ़ा।
- महिलाओं की दैनिक आय 550 से 600 रुपये तक पहुंची।
- समिति का मासिक कारोबार 3 से 4 लाख रुपये हुआ।
- आधुनिक करघों और प्रशिक्षण से गुणवत्ता में सुधार आया।
- ओडिशा के बाजारों में उत्पादों की अच्छी मांग है।
संबलपुरी साड़ियां बनाकर बढ़ी महिलाओं की आर्थिक मजबूती
ग्रामोदय बुनकर सहकारी समिति ने महिलाओं को कच्चा माल, प्रशिक्षण और विपणन की सुविधा उपलब्ध कराई। इससे उत्पादन में निरंतर वृद्धि हुई और महिलाओं को नियमित रोजगार मिलने लगा।
छत्तीसगढ़ शासन के सहयोग से आधुनिक करघे, धागा और आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई गई। इसके परिणामस्वरूप बाजार की मांग के अनुरूप बेहतर गुणवत्ता वाले वस्त्र तैयार किए जा रहे हैं।
संबलपुरी साड़ियां दे रही हैं राष्ट्रीय बाजार में नई पहचान
ग्राम नारी की महिलाएं हर महीने 300 से 400 संबलपुरी साड़ियों का निर्माण कर रही हैं। इनकी बिक्री मुख्य रूप से ओडिशा के विभिन्न बाजारों में हो रही है, जहां गुणवत्ता और आकर्षक डिज़ाइन के कारण अच्छी मांग बनी हुई है।
संबलपुरी साड़ियां तैयार करने से महिलाओं की आय पहले की तुलना में काफी बढ़ी है। भविष्य में कौशल विकास के जरिए उत्पादन और आय दोनों बढ़ाने की योजना पर काम किया जा रहा है।
हाथकरघा क्षेत्र को मिल रही नई दिशा
इस पहल ने ग्रामीण महिलाओं में आत्मविश्वास बढ़ाया है। साथ ही स्थानीय स्तर पर रोजगार और पारंपरिक हस्तकला को भी नई मजबूती मिली है।
यदि उत्पादों की प्रभावी ब्रांडिंग और डिजिटल मार्केटिंग की जाए, तो छत्तीसगढ़ के हाथकरघा उत्पाद राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंच सकते हैं।
प्रमुख अपडेट
- संबलपुरी साड़ियों का उत्पादन लगातार बढ़ रहा है।
- महिलाओं की आय में उल्लेखनीय सुधार हुआ।
- मासिक कारोबार 3 से 4 लाख रुपये तक पहुंचा।
- सरकारी योजनाओं से उत्पादन क्षमता मजबूत हुई।
- हाथकरघा उद्योग को नए बाजार मिलने की संभावना बढ़ी।

