नई दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन में छत्तीसगढ़ की जनजातीय संस्कृति को विशेष सम्मान मिला। बस्तर पंडुम के विजेताओं और 209 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल का आत्मीय स्वागत किया गया। प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने किया। इस अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने स्वयं अतिथियों को भोजन परोसकर सम्मानित किया। यह दृश्य सभी प्रतिनिधियों के लिए यादगार बन गया।
राष्ट्रपति ने कहा कि बस्तर की सांस्कृतिक विरासत पूरे देश की अमूल्य धरोहर है। उन्होंने कलाकारों, मांझी-चालकी व्यवस्था और जनजातीय समाज के योगदान की खुलकर सराहना की।
मुख्य बातें
- राष्ट्रपति भवन में 209 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल का स्वागत हुआ।
- राष्ट्रपति ने स्वयं अतिथियों को भोजन परोसा।
- मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया।
- पद्मश्री सम्मानित विभूतियां भी कार्यक्रम में शामिल रहीं।
- केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी कार्यक्रम में उपस्थित रहे।
राष्ट्रपति ने बस्तर आने की इच्छा जताई
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहा कि वह भविष्य में बस्तर दशहरा और बस्तर पंडुम में शामिल होना चाहती हैं। उन्होंने बताया कि बस्तर दशहरा से उनका विशेष भावनात्मक जुड़ाव रहा है। उन्होंने मांझी-चालकी व्यवस्था को सामाजिक एकता और सांस्कृतिक संरक्षण की मजबूत परंपरा बताया।
राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि ऐसे आयोजन युवाओं को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ते हैं। साथ ही पर्यटन और स्थानीय रोजगार को भी नई गति मिलती है।
झिटकू-मिटकी की कलाकृति बनी आकर्षण का केंद्र
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने राष्ट्रपति को लगभग 300 वर्ष पुरानी लोकगाथा ‘झिटकू-मिटकी’ पर आधारित विशेष कलाकृति भेंट की। बस्तर पंडुम के इस अवसर पर दी गई यह स्मृति बस्तर की लोकआस्था, प्रेम और सामाजिक सौहार्द का प्रतीक मानी जाती है।
लोकमान्यता के अनुसार झिटकू और मिटकी ने कठिन समय में त्याग और समर्पण की मिसाल पेश की थी। आज भी बस्तर क्षेत्र में दोनों को श्रद्धापूर्वक स्मरण किया जाता है।
अमित शाह ने जनजातीय संस्कृति की सराहना की
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि उन्होंने पहली बार राष्ट्रपति भवन में बस्तर की पारंपरिक वेशभूषा में इतना बड़ा जनजातीय प्रतिनिधिमंडल देखा। उन्होंने इसे भारत की सांस्कृतिक विविधता का अनूठा उदाहरण बताया।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि बस्तर पंडुम ने जनजातीय संस्कृति को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाई है। उन्होंने विश्वास जताया कि इससे स्थानीय कलाकारों और सांस्कृतिक विरासत को और मजबूती मिलेगी।
कार्यक्रम की प्रमुख उपलब्धियां
- राष्ट्रपति ने बस्तर आने की इच्छा व्यक्त की।
- जनजातीय संस्कृति को राष्ट्रीय मंच पर सम्मान मिला।
- झिटकू-मिटकी की ऐतिहासिक कलाकृति भेंट की गई।
- प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति भवन का भ्रमण किया।
- बस्तर की सांस्कृतिक विरासत को नई राष्ट्रीय पहचान मिली।

