पोषण सहायता से टीबी मरीजों को मिली नई उम्मीद, जशपुर की पहल बनी प्रेरणा

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टीबी के इलाज में दवाओं के साथ पोषण सहायता भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। जशपुर जिले में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के जिला डाटा प्रबंधक निरंजन प्रसाद गुप्ता ने निक्षय मित्र के रूप में 60 टीबी मरीजों को नियमित पोषण सहयोग उपलब्ध कराया है। इनमें 19 विशेष पिछड़ी जनजाति (PVTG) समुदाय के मरीज भी शामिल हैं।

मुख्य बातें

  • 60 टीबी मरीजों को नियमित पोषण सहयोग।
  • 19 पीवीटीजी समुदाय के मरीजों को विशेष सहायता।
  • निक्षय मित्र के रूप में निरंतर मार्गदर्शन।
  • घर-घर जाकर स्वास्थ्य जागरूकता अभियान।
  • राज्य स्तरीय निक्षय मित्र पुरस्कार से सम्मानित।
  • उपचार पूरा करने के लिए प्रेरित किया गया।

पोषण सहायता से उपचार को मिली मजबूती

टीबी से पीड़ित मरीजों के लिए संतुलित और पौष्टिक भोजन उपचार का महत्वपूर्ण हिस्सा होता है। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए इसे जुटाना आसान नहीं होता। ऐसे में निरंजन गुप्ता ने मरीजों को नियमित पोषण किट उपलब्ध कराकर उपचार की निरंतरता बनाए रखने में मदद की।

उन्होंने दूरस्थ क्षेत्रों के पहाड़ी कोरवा और बिरहोर समुदाय के मरीजों तक पहुंचकर स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ सुनिश्चित किया। इससे मरीजों का आत्मविश्वास बढ़ा और समय पर इलाज पूरा करने की प्रवृत्ति मजबूत हुई।

पोषण सहायता के साथ बढ़ी स्वास्थ्य जागरूकता

निरंजन गुप्ता ने मरीजों और उनके परिवारों को टीबी के लक्षण, नियमित दवा सेवन, संक्रमण से बचाव और उपचार पूरा करने के महत्व के बारे में भी जागरूक किया। लगातार संवाद से समुदाय में स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति भरोसा बढ़ा।

इन उल्लेखनीय प्रयासों के लिए उन्हें दिसंबर 2024 में राज्य स्तरीय निक्षय मित्र पुरस्कार से सम्मानित किया गया। यह पहल सामाजिक सहयोग और जनभागीदारी का प्रेरक उदाहरण बनकर सामने आई है।

सामुदायिक सहयोग से आसान होगा टीबी उन्मूलन

विशेषज्ञों का मानना है कि टीबी के खिलाफ लड़ाई में सामाजिक सहयोग और पोषण दोनों समान रूप से जरूरी हैं। अधिक लोग निक्षय मित्र बनकर आगे आएंगे, तो जरूरतमंद मरीजों को समय पर सहायता मिलेगी और टीबी उन्मूलन अभियान को नई गति मिलेगी।

प्रमुख अपडेट

  • 60 टीबी मरीजों को पोषण सहयोग।
  • 19 पीवीटीजी मरीजों को नियमित सहायता।
  • स्वास्थ्य जागरूकता अभियान जारी।
  • घर-घर पहुंचकर किया मार्गदर्शन।
  • राज्य स्तरीय सम्मान से नवाजे गए।
  • सामुदायिक भागीदारी पर विशेष जोर।

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