छत्तीसगढ़ का समावेशी विकास बना उदाहरण, जरूरतमंदों तक पहुंचीं कल्याणकारी योजनाएं

CG DARSHAN
CG DARSHAN 3 Min Read
3 Min Read
Advertisement Carousel

विकसित भारत के लक्ष्य में सामाजिक समानता की महत्वपूर्ण भूमिका है। इसी सोच के साथ छत्तीसगढ़ सरकार ने समावेशी विकास को प्राथमिकता देते हुए समाज के कमजोर वर्गों तक योजनाओं का लाभ पहुंचाया है। पिछले ढाई वर्षों में राज्य ने सामाजिक सुरक्षा, डिजिटल प्रशासन और पुनर्वास सेवाओं के माध्यम से कई उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और समाज कल्याण मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े के नेतृत्व में दिव्यांगजन, वरिष्ठ नागरिक, विधवा एवं परित्यक्त महिलाओं तथा अन्य जरूरतमंद वर्गों के लिए कई नई पहल की गई हैं। इन प्रयासों का उद्देश्य केवल सहायता देना नहीं, बल्कि सम्मानजनक और आत्मनिर्भर जीवन सुनिश्चित करना भी है।

समावेशी विकास से मजबूत हुई सामाजिक सुरक्षा

राज्य की पेंशन योजनाएं आज लाखों परिवारों के लिए आर्थिक आधार बन चुकी हैं। मुख्यमंत्री पेंशन योजना सहित विभिन्न सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से 21.73 लाख से अधिक नागरिक लाभान्वित हो रहे हैं। इससे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को नियमित सहायता मिल रही है।

डीबीटी प्रणाली के माध्यम से अधिकांश हितग्राहियों के बैंक खातों में सीधे राशि भेजी जा रही है। आधार सीडिंग और ई-केवाईसी ने भुगतान प्रक्रिया को पारदर्शी और विश्वसनीय बनाया है।

दिव्यांग सशक्तिकरण में दर्ज हुई उल्लेखनीय प्रगति

राज्य में यूडीआईडी कार्ड धारकों की संख्या लगातार बढ़ी है। कृत्रिम अंग और सहायक उपकरण योजना का लाभ पहले की तुलना में कई गुना अधिक लोगों तक पहुंचा है। सामर्थ्य विकास योजना ने कौशल विकास और पुनर्वास को नई दिशा दी है।

समावेशी विकास के लिए शिक्षा और पुनर्वास पर जोर

दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए छात्रवृत्ति योजनाओं का विस्तार किया गया है। विशेष विद्यालयों और पुनर्वास केंद्रों को भी मजबूत बनाया गया है। इससे शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच पहले से अधिक आसान हुई है।

वरिष्ठ नागरिकों के लिए मजबूत सहायता तंत्र

बढ़ती वृद्धजन आबादी को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने सियान हेल्पलाइन को और प्रभावी बनाया है। वृद्धाश्रमों और देखरेख संस्थाओं की क्षमता में भी वृद्धि की गई है। इससे वरिष्ठ नागरिकों को समय पर सहायता और परामर्श मिल रहा है।

नशामुक्ति अभियान से सामाजिक बदलाव

भारत माता वाहिनी योजना के अंतर्गत नशामुक्ति केंद्रों की संख्या बढ़ाई गई है। इन केंद्रों में उपचार, परामर्श और पुनर्वास की सुविधाएं उपलब्ध हैं। इससे प्रभावित लोगों को सामान्य जीवन में लौटने का अवसर मिल रहा है।

डिजिटल प्रशासन बना विकास का आधार

डीबीटी, डिजिटल डेटा प्रबंधन और हेल्पलाइन आधारित सेवाओं ने सरकारी योजनाओं को अधिक प्रभावी बनाया है। तकनीक और मानवीय संवेदनशीलता का संतुलन समावेशी विकास की अवधारणा को मजबूत करता है। इससे योजनाओं की निगरानी और सेवा वितरण दोनों बेहतर हुए हैं।

प्रमुख उपलब्धियां

  • 21.73 लाख से अधिक नागरिकों को नियमित सामाजिक सहायता।
  • दिव्यांग विद्यार्थियों की छात्रवृत्ति में उल्लेखनीय वृद्धि।
  • यूडीआईडी और सहायक उपकरण योजनाओं का विस्तार।
  • नशामुक्ति केंद्रों और पुनर्वास सेवाओं को मजबूती।
  • डिजिटल भुगतान प्रणाली से पारदर्शी प्रशासन सुनिश्चित।

Share This Article
Leave a comment