छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में आज से मां दंतेश्वरी दशहरा का शुभारंभ होने जा रहा है। 75 दिनों तक चलने वाला यह विश्व प्रसिद्ध पर्व अपनी अनूठी जनजातीय परंपराओं और धार्मिक मान्यताओं के लिए जाना जाता है। पाट जात्रा पूजा के साथ शुरू होने वाले इस आयोजन में हजारों श्रद्धालु और स्थानीय समुदाय की सक्रिय भागीदारी रहती है।
मुख्य अपडेट
- 12 अगस्त से पाट जात्रा पूजा के साथ शुभारंभ।
- 75 दिनों तक धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन।
- मां दंतेश्वरी को समर्पित विशेष पूजा-अर्चना।
- रथ निर्माण की पारंपरिक प्रक्रिया आज से शुरू।
- 27 अक्टूबर को मावली माता की विदाई के साथ समापन।
मां दंतेश्वरी दशहरा की शुरुआत कैसे होती है?
इस पर्व का पहला अनुष्ठान पाट जात्रा पूजा है। इस अवसर पर मांझी-चालकी, पुजारी, पटेल, नाइक-पाइक, मेम्बर-मेम्बरीन और अन्य पारंपरिक सेवादार रथ निर्माण के लिए औजार तैयार करने की रस्म निभाते हैं।
यह पूजा पूरे पर्व की औपचारिक शुरुआत मानी जाती है। बस्तर दशहरा समिति ने सभी श्रद्धालुओं, ग्रामीणों और गणमान्य नागरिकों से इस आयोजन में शामिल होने की अपील की है।
मां दंतेश्वरी दशहरा का प्रमुख कार्यक्रम
मुख्य कार्यक्रम के अनुसार 24 सितंबर को डेरी गड़ाई पूजा आयोजित होगी। 10 अक्टूबर को काछनगादी पूजा और 11 अक्टूबर को कलश स्थापना की रस्म निभाई जाएगी। 12 अक्टूबर को जोगी बिठाई पूजा का आयोजन होगा।
13 से 18 अक्टूबर तक प्रतिदिन नवरात्रि पूजा और रथ परिक्रमा होगी। 19 अक्टूबर को महाअष्टमी और निशा जात्रा का आयोजन होगा। 20 अक्टूबर को कुंवारी पूजा, जोगी उठाई और मावली परघाव संपन्न होंगे।
21 और 22 अक्टूबर को भीतर रैनी तथा बाहर रैनी की पारंपरिक रस्में होंगी। 23 अक्टूबर को काछन जात्रा और ऐतिहासिक मुरिया दरबार आयोजित होगा। 24 अक्टूबर को कुटुम्ब जात्रा के साथ ग्राम्य देवी-देवताओं की विदाई होगी। 27 अक्टूबर को मावली माता की डोली की विदाई के साथ पर्व संपन्न होगा।
क्यों है यह पर्व खास?
बस्तर का दशहरा देश के अन्य दशहरा उत्सवों से अलग है। यहां भगवान श्रीराम की विजय के बजाय मां दंतेश्वरी की आराधना केंद्र में रहती है। इसलिए यह पर्व धार्मिक आस्था के साथ जनजातीय संस्कृति का भी महत्वपूर्ण प्रतीक माना जाता है।
इसके अलावा रथ निर्माण, रथ परिक्रमा, मुरिया दरबार और पारंपरिक पूजा विधान इस आयोजन को विशिष्ट पहचान देते हैं। हर वर्ष देश-विदेश से पर्यटक इस उत्सव को देखने पहुंचते हैं।
एक नजर में
- शुरुआत: 12 अगस्त
- प्रथम अनुष्ठान: पाट जात्रा पूजा
- अवधि: 75 दिन
- प्रमुख देवी: मां दंतेश्वरी
- विशेष आकर्षण: रथ परिक्रमा, मुरिया दरबार और काछन जात्रा
- समापन: 27 अक्टूबर
बस्तर की परंपरा का जीवंत उत्सव
मां दंतेश्वरी दशहरा केवल धार्मिक आयोजन नहीं है। यह बस्तर की सांस्कृतिक विरासत, जनजातीय परंपराओं और सामाजिक एकता का महोत्सव भी है। आने वाले 75 दिनों तक यह पर्व आस्था और संस्कृति का अनूठा संगम प्रस्तुत करेगा। यही कारण है कि मां दंतेश्वरी दशहरा देश के सबसे विशिष्ट पर्वों में गिना जाता है।


