जयमंती खेस को मिला पढ़ाई का डिजिटल सहारा

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जशपुर की दृष्टिबाधित छात्रा जयमंती खेस ने शिक्षा के प्रति मजबूत संकल्प दिखाया है। बीए अंतिम वर्ष में पढ़ रही जयमंती शिक्षक बनने का सपना देखती हैं। अब तकनीक उनके अध्ययन को आसान बनाने में सहयोग करेगी।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने 17 अगस्त को ग्राम बगिया स्थित अपने निवास पर उन्हें विशेष सॉफ्टवेयर वाला लैपटॉप प्रदान किया। इस पहल से डिजिटल अध्ययन सामग्री तक उनकी पहुंच बढ़ेगी।

मुख्य बातें

  • जयमंती बीए अंतिम वर्ष की छात्रा हैं।
  • मुख्यमंत्री ने उन्हें विशेष सॉफ्टवेयर वाला लैपटॉप दिया।
  • सॉफ्टवेयर से स्क्रीन की सामग्री आवाज में सुनी जा सकेगी।
  • जयमंती ने शिक्षक बनने की इच्छा जताई।
  • लैपटॉप की मांग कलेक्टर जनदर्शन में रखी गई थी।

जयमंती खेस को लैपटॉप मिलने से पढ़ाई होगी आसान

जयमंती खेस को लैपटॉप मिलने से डिजिटल अध्ययन का नया विकल्प मिला है। इसमें विशेष सहायक सॉफ्टवेयर लगाया गया है। यह स्क्रीन पर उपलब्ध सामग्री को आवाज के माध्यम से सुनने में मदद करेगा।

अब जयमंती डिजिटल पुस्तकें, नोट्स और अन्य शैक्षणिक सामग्री का उपयोग कर सकेंगी। इससे उनकी पढ़ाई अधिक सुविधाजनक होने की उम्मीद है।

इसके अलावा, डिजिटल माध्यमों से स्वतंत्र अध्ययन की क्षमता भी बढ़ेगी। यह सुविधा उच्च शिक्षा के दौरान उनके लिए महत्वपूर्ण सहयोग साबित हो सकती है।

जयमंती खेस को लैपटॉप से बढ़ेगी डिजिटल पहुंच

जयमंती रायपुर के डिग्री गर्ल्स कॉलेज में बीए अंतिम वर्ष की छात्रा हैं। दृष्टिबाधा के बावजूद शिक्षा के प्रति उनकी लगन लगातार बनी हुई है।

विशेष तकनीक के माध्यम से अब उन्हें अध्ययन सामग्री तक बेहतर पहुंच मिलेगी। इससे पढ़ाई के लिए दूसरों पर निर्भरता कम करने में भी मदद मिल सकती है।

शिक्षक बनने की इच्छा पर मुख्यमंत्री ने बढ़ाया हौसला

लैपटॉप प्रदान करते समय मुख्यमंत्री ने जयमंती से बातचीत की। उन्होंने उनके भविष्य के लक्ष्य के बारे में पूछा।

जयमंती ने आत्मविश्वास के साथ शिक्षक बनने की इच्छा जताई। मुख्यमंत्री ने उनके जवाब की सराहना करते हुए उत्साह बढ़ाया।

उन्होंने कहा कि शिक्षक राष्ट्र निर्माता होते हैं। मुख्यमंत्री ने जयमंती को मेहनत और लगन से लक्ष्य की ओर बढ़ने की सलाह दी।

दिव्यांग विद्यार्थियों को समान अवसर देने पर जोर

मुख्यमंत्री ने कहा कि हर विद्यार्थी को आगे बढ़ने का समान अवसर मिलना चाहिए। उन्होंने दिव्यांग विद्यार्थियों को जरूरत के अनुसार संसाधन उपलब्ध कराने की प्रतिबद्धता जताई।

सरकार का उद्देश्य दिव्यांग विद्यार्थियों को शिक्षा के साथ आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ाना है। इसके लिए तकनीकी सहयोग भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

जनदर्शन से पूरी हुई पढ़ाई की जरूरत

जयमंती ने अपनी पढ़ाई को सुगम बनाने के लिए कलेक्टर जनदर्शन में लैपटॉप की मांग रखी थी। उनकी जरूरत को देखते हुए समाज कल्याण विभाग को सहायता देने के निर्देश दिए गए।

विभाग ने छात्रा की आवश्यकताओं के अनुसार सहायक सॉफ्टवेयर वाला लैपटॉप तैयार कराया। इसके बाद मुख्यमंत्री ने स्वयं यह लैपटॉप जयमंती को प्रदान किया।

इस तरह जनदर्शन में रखी गई मांग का समाधान हुआ। तकनीकी संसाधन मिलने से उनकी पढ़ाई को नई सुविधा मिली है।

विशेष सॉफ्टवेयर से सुन सकेंगी अध्ययन सामग्री

समाज कल्याण विभाग के अनुसार, लैपटॉप में विशेष सहायक सॉफ्टवेयर उपलब्ध कराया गया है। इसके जरिए स्क्रीन पर दिखाई देने वाली सामग्री को आवाज में सुना जा सकेगा।

इस सुविधा से जयमंती डिजिटल किताबों और नोट्स का इस्तेमाल अधिक आसानी से कर सकेंगी। साथ ही, डिजिटल शिक्षा के प्रति उनकी स्वतंत्रता भी बढ़ सकती है।

जयमंती खेस को लैपटॉप ने दी नई उम्मीद

तकनीकी सहयोग से जयमंती के शिक्षक बनने के लक्ष्य को नई ऊर्जा मिली है। उनकी कहानी शिक्षा में सुलभ तकनीक की उपयोगिता को सामने लाती है।

सही संसाधन और अवसर मिलने पर विद्यार्थी अपनी क्षमता के अनुसार आगे बढ़ सकते हैं। इसलिए दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए तकनीक आधारित शिक्षा को बढ़ावा देना जरूरी है।

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