अभिनेता आयुष्मान खुराना जालना दौरे को लेकर चर्चा में हैं। उन्होंने ग्रामीण क्षेत्र में बच्चों से बातचीत की। इस दौरान एक छात्रा ने उन्हें अपनी समस्या बताई। छात्रा ने स्कूल तक पहुंचने वाली सड़कों की स्थिति पर चिंता जताई। उसने बताया कि असुरक्षित रास्तों के कारण लड़कियों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है।
बच्चों की समस्याओं को सुनकर अभिनेता ने चिंता जताई। उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर सुविधाओं की जरूरत पर जोर दिया। आयुष्मान लंबे समय से बाल अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर सक्रिय हैं। यूनिसेफ इंडिया ने उन्हें 2023 में राष्ट्रीय राजदूत नियुक्त किया था।
जालना दौरे में छात्रा ने सौंपा पत्र
आयुष्मान खुराना जालना दौरे के दौरान बच्चों के साथ संवाद कर रहे थे। इसी दौरान एक छात्रा ने उन्हें पत्र दिया। पत्र में स्कूल तक जाने वाले रास्ते की समस्या बताई गई थी।
छात्रा के अनुसार, खराब और असुरक्षित रास्तों के कारण पढ़ाई मुश्किल होती है। खासकर लड़कियों को स्कूल आने-जाने में परेशानी होती है। यह मुद्दा सामने आने के बाद स्थानीय प्रशासन का ध्यान भी आकर्षित हुआ।
अभिनेता ने बच्चों की बात को गंभीरता से सुना। उन्होंने शिक्षा के लिए सुरक्षित वातावरण को जरूरी बताया। साथ ही ग्रामीण भारत की बुनियादी समस्याओं पर भी अपनी चिंता जाहिर की।
आयुष्मान खुराना जालना में बच्चों की बात सुनकर भावुक हुए
बच्चों की परिस्थितियों को देखकर अभिनेता भावुक नजर आए। उन्होंने बच्चों की आवाज को महत्व देने की बात कही। उनका कहना था कि बच्चों की परेशानियों को दूर करना जरूरी है।
छात्रा की ओर से दिया गया पत्र संबंधित प्रशासन तक पहुंचाने की बात भी सामने आई। इससे समस्या के समाधान की उम्मीद बढ़ी है।
शिक्षा के साथ सुरक्षित रास्ते भी जरूरी
स्कूल तक पहुंच केवल कक्षा और शिक्षक उपलब्ध होने तक सीमित नहीं है। सुरक्षित रास्ते और परिवहन भी शिक्षा का अहम हिस्सा हैं। ग्रामीण इलाकों में यह समस्या कई बच्चों को प्रभावित कर सकती है।
छात्राओं के लिए सुरक्षित आवागमन की व्यवस्था विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। इसलिए स्थानीय स्तर पर सड़क और परिवहन सुविधाओं को बेहतर बनाना जरूरी है।
आयुष्मान खुराना जालना यात्रा ने इसी तरह के स्थानीय मुद्दे को चर्चा में ला दिया है। बच्चों की ओर से उठाई गई समस्या ने प्रशासन की जिम्मेदारी भी सामने रखी है।
यूनिसेफ के साथ लंबे समय से जुड़े हैं अभिनेता
आयुष्मान खुराना वर्ष 2020 से यूनिसेफ इंडिया से जुड़े हैं। उस समय उन्हें सेलिब्रिटी एडवोकेट बनाया गया था। वर्ष 2023 में उन्हें राष्ट्रीय राजदूत की जिम्मेदारी मिली।
यूनिसेफ के अनुसार, वह बच्चों के अधिकारों से जुड़े कई विषयों पर काम कर चुके हैं। इनमें हिंसा की रोकथाम, ऑनलाइन सुरक्षा और लैंगिक समानता शामिल हैं। वह मानसिक स्वास्थ्य और बाल अधिकारों को लेकर भी जागरूकता फैलाते रहे हैं।
बच्चों के अधिकारों को लेकर लगातार सक्रिय
- आयुष्मान 2020 से यूनिसेफ से जुड़े हैं।
- 2023 में उन्हें राष्ट्रीय राजदूत बनाया गया।
- वह बाल अधिकारों के लिए जागरूकता फैलाते हैं।
- ऑनलाइन सुरक्षा और साइबरबुलिंग पर काम किया है।
- लैंगिक समानता और मानसिक स्वास्थ्य पर भी बात करते हैं।
ग्रामीण भारत की समस्याओं पर दिया जोर
आयुष्मान खुराना जालना दौरे के दौरान ग्रामीण बच्चों की चुनौतियां सामने आईं। अभिनेता ने बच्चों की शिक्षा और सुरक्षा को विकास से जोड़कर देखा।
उनका मानना है कि बच्चों की आवाज को सुना जाना चाहिए। इसके साथ ही उनकी समस्याओं पर समय रहते कार्रवाई भी जरूरी है। छात्रा का पत्र इसी भागीदारी का उदाहरण बनकर सामने आया।
यूनिसेफ भी बच्चों और किशोरों की भागीदारी को महत्वपूर्ण मानता है। संस्था बच्चों को सुरक्षित और समान अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में काम करती है।
आयुष्मान का फिल्मी करियर भी जारी
कामकाज की बात करें तो आयुष्मान खुराना फिल्मों में भी सक्रिय हैं। खबरों के अनुसार, वह सूरज बड़जात्या की आगामी फिल्म ‘ये प्रेम मोल लिया’ में नजर आएंगे।
फिल्म में शरवरी, अनुपम खेर, सौम्या टंडन, सीमा पाहवा और स्वानंद किरकिरे अहम भूमिकाओं में बताए गए हैं। फिल्म की रिलीज को लेकर 27 नवंबर की तारीख चर्चा में है।
सामाजिक सरोकारों और सिनेमा के बीच अभिनेता लगातार सक्रिय दिखाई दे रहे हैं। आयुष्मान खुराना जालना दौरे ने बच्चों की शिक्षा और सुरक्षित आवागमन जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे को सामने रखा है।
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