बीजापुर के अंदरूनी इलाकों में नक्सल पीड़ित परिवारों से मिलने डॉ. प्रेमा साईं जी महाराज पहुंचे। बारिश और कीचड़ से भरे रास्तों के बीच भी उन्होंने यात्रा जारी रखी। यमपुर और नेलाकांकेर में उन्होंने प्रभावित परिवारों से संवाद किया। साथ ही, उनकी समस्याओं और जरूरतों को करीब से समझा।
नक्सल पीड़ित परिवारों को मिला आर्थिक सहयोग
यमपुर पहुंचने के दौरान बारिश के कारण रास्ते मुश्किल हो गए थे। काफिले का एक वाहन कीचड़ में फंस गया। वहीं, एक अन्य वाहन खराब हो गया। इसके बावजूद डॉ. प्रेमा साईं जी महाराज ने यात्रा नहीं रोकी। वह ग्रामीणों के बीच पहुंचे और हिंसा में जान गंवाने वाले परिवारों से मुलाकात की।
यमपुर में सुन्नम सम्मैया और वेक्को संदीप के परिवारों को 21-21 हजार रुपये की सहायता दी गई। महिलाओं को साड़ी दी गई। बच्चों को कपड़े और शैक्षणिक सामग्री भी वितरित की गई। इनमें कॉपी, पेन, कंपास बॉक्स और चप्पल शामिल थीं।
मुख्य बातें:
- यमपुर और नेलाकांकेर में परिवारों से मुलाकात।
- यमपुर के दो परिवारों को 21-21 हजार रुपये की सहायता।
- महिलाओं और बच्चों को जरूरी सामग्री दी गई।
- ग्रामीणों के साथ बैठकर उनकी समस्याएं सुनी गईं।
- कठिन मौसम के बावजूद अंदरूनी गांवों तक पहुंचे।
नेलाकांकेर में नक्सल पीड़ित परिवारों से मुलाकात
यमपुर के बाद डॉ. प्रेमा साईं जी महाराज ने नेलाकांकेर का दौरा किया। यहां उन्होंने तिरुपति सोढ़ी और रवि कट्टम के परिवारों से मुलाकात की। दोनों परिवारों की परिस्थितियों को समझने के बाद 31-31 हजार रुपये की सहायता दी गई।
तिरुपति सोढ़ी के परिवार से बातचीत के दौरान उनकी बेटी संध्या की शादी को लेकर बड़ी घोषणा की गई। डॉ. प्रेमा साईं जी महाराज ने शादी का पूरा खर्च उठाने और कन्यादान करने की बात कही। इस घोषणा से परिवार और ग्रामीण भावुक हो गए।
बच्चों और महिलाओं के लिए भी सहायता
नेलाकांकेर में बच्चों को कपड़े, स्कूल बैग और पढ़ाई की सामग्री दी गई। इसके अलावा, उन्हें चप्पल भी वितरित की गईं। कई बच्चों को डॉ. प्रेमा साईं जी महाराज ने अपने हाथों से चप्पल पहनाई।
महिलाओं को साड़ियां दी गईं। वहीं, ग्रामीणों के साथ बैठकर भोजन भी किया गया। नक्सल पीड़ित परिवारों से संवाद के दौरान उनकी समस्याओं को सुना गया। साथ ही, भविष्य में सहयोग का भरोसा भी दिया गया।
बस्तर में शांति और विकास का संदेश
ग्रामीणों से बातचीत के दौरान डॉ. प्रेमा साईं जी महाराज ने बस्तर में शांति और विकास पर जोर दिया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा के प्रयासों का उल्लेख किया।
उन्होंने कहा कि बस्तर में शांति और विकास का लाभ आम ग्रामीणों तक पहुंचना चाहिए। इसके अलावा, प्रभावित परिवारों को सम्मान और अपनत्व देने की जरूरत भी बताई।
सहायता के प्रमुख पहलू:
- परिवारों को आर्थिक सहायता प्रदान की गई।
- बच्चों को स्कूल से जुड़ी सामग्री दी गई।
- महिलाओं को साड़ी वितरित की गई।
- ग्रामीणों के साथ संवाद और भोजन किया गया।
- संध्या की शादी का खर्च उठाने की घोषणा की गई।
नक्सल पीड़ित परिवारों को दिया भरोसा
डॉ. प्रेमा साईं जी महाराज ने कहा कि हिंसा से प्रभावित परिवारों की पीड़ा को केवल व्यक्तिगत समस्या नहीं माना जाना चाहिए। ऐसे परिवारों के साथ समाज का खड़ा होना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि सहायता का उद्देश्य केवल आर्थिक मदद देना नहीं है। परिवारों को यह भरोसा दिलाना भी जरूरी है कि वे अकेले नहीं हैं। इसी भावना के साथ नक्सल पीड़ित परिवारों तक पहुंचकर सहयोग और संवेदना का संदेश दिया गया।
कुल मिलाकर, बीजापुर के दुर्गम क्षेत्रों की यह यात्रा मानवीय संवेदना का संदेश देती है। बारिश और कठिन रास्तों के बावजूद जरूरतमंद परिवारों तक मदद पहुंचाई गई। इससे उन्हें आर्थिक सहयोग के साथ भावनात्मक संबल भी मिला।


