कनाडा पर ट्रंप का वार, कार्नी ने दिया जवाब; यूरोप से बढ़ाएंगे रिश्ते

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कनाडा पर ट्रंप का वार, बढ़ा व्यापार तनाव

अमेरिका और कनाडा के बीच व्यापारिक विवाद लगातार गहराता जा रहा है। अमेरिकी प्रशासन ने कनाडाई उत्पादों को लेकर कई कड़े कदम उठाए हैं। वहीं, कनाडा ने भी करीब 20 अरब डॉलर के अमेरिकी सामान पर जवाबी टैरिफ लगाए हैं। कनाडा पर ट्रंप का वार अब दोनों देशों के रिश्तों पर असर डाल रहा है।

अमेरिका ने उठाए कई कड़े कदम

व्हाइट हाउस ने कनाडा से आने वाले कई उत्पादों को लेकर नए प्रतिबंधों की घोषणा की है। इनमें डेयरी उत्पाद, ज्यादातर शराब और मोटरसाइकिल शामिल हैं। यह व्यवस्था करीब तीन सप्ताह में लागू होने की बात कही गई है।

इसके अलावा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कनाडाई सामान को अमेरिकी सरकार के बड़े और लंबे समय वाले कॉन्ट्रैक्ट से बाहर रखने का निर्देश दिया है।

जनरल सर्विसेज एडमिनिस्ट्रेशन यानी GSA को इस संबंध में कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। अमेरिका का कहना है कि कनाडा को अमेरिकी उत्पादों के लिए समान बाजार पहुंच सुनिश्चित करनी होगी।

कनाडा ने दिया 20 अरब डॉलर का जवाब

कनाडा पर ट्रंप का वार के बाद कनाडा ने भी जवाबी कदम उठाया है। प्रधानमंत्री मार्क कार्नी की सरकार ने करीब 20 अरब डॉलर के अमेरिकी सामान पर टैरिफ लगाए हैं।

इस सूची में स्टील और एल्युमीनियम शामिल हैं। इसके अलावा चीज, कपड़े, कॉस्मेटिक्स और कृषि उपकरण भी दायरे में हैं।

अलग-अलग उत्पादों पर 15, 25 और 50 प्रतिशत तक शुल्क लगाया गया है। कनाडा ने इस कदम को अपने घरेलू कारोबार और कर्मचारियों के हितों से जोड़ा है।

कार्नी की रणनीति में आत्मनिर्भरता पर जोर

प्रधानमंत्री मार्क कार्नी का कहना है कि कनाडा को अपनी आर्थिक निर्भरता कम करने की जरूरत है। उनका जोर ऐसे व्यापार मॉडल पर है, जिसमें किसी एक देश पर अत्यधिक निर्भरता न हो।

हालांकि, इस बदलाव की अपनी चुनौतियां हैं। कनाडा का 70 प्रतिशत से ज्यादा निर्यात अमेरिका को जाता है। इसलिए अमेरिकी बाजार से निर्भरता कम करना आसान नहीं होगा।

कनाडा अब नए बाजारों की तलाश में

कार्नी सरकार अब व्यापार के दूसरे विकल्पों पर भी ध्यान दे रही है। कनाडा यूरोपीय संघ के साथ आर्थिक और रणनीतिक संबंधों को और मजबूत करने पर विचार कर रहा है।

एक कनाडाई अधिकारी के अनुसार, मौजूदा समझौतों को विस्तार देने का विकल्प मौजूद है। इसके अलावा नई संधि या सहयोग के दूसरे मॉडल पर भी चर्चा हो सकती है।

हालांकि, अभी किसी एक मॉडल पर अंतिम निर्णय नहीं हुआ है। कनाडा इस विषय पर अपने प्रांतों, क्षेत्रों और श्रमिक समूहों से भी सलाह ले रहा है।

यूरोप दौरा अहम क्यों?

कनाडा पर ट्रंप का वार के बीच मार्क कार्नी अगले सप्ताह फ्रांस के स्ट्रासबर्ग जाएंगे। वहां वह 16 सितंबर को यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन के कार्यक्रम में शामिल होंगे।

इसके अगले दिन कनाडाई प्रधानमंत्री यूरोपीय संसद को संबोधित करेंगे। ऐसे में यह दौरा कनाडा की नई व्यापारिक प्राथमिकताओं के लिहाज से महत्वपूर्ण हो सकता है।

यूरोप के साथ व्यापार बढ़ाने से कनाडा को अपने निर्यात बाजार में विविधता लाने में मदद मिल सकती है।

अमेरिका-कनाडा रिश्तों में क्यों बढ़ा तनाव?

अमेरिका और कनाडा के बीच लंबे समय से मजबूत आर्थिक रिश्ते रहे हैं। दोनों देश व्यापार के अलावा रक्षा और सुरक्षा के क्षेत्र में भी करीबी साझेदार हैं।

इसके बावजूद हाल के महीनों में टैरिफ विवाद ने रिश्तों को प्रभावित किया है। 21 अगस्त को व्यापार वार्ता विफल होने के बाद तनाव और बढ़ गया।

इसके बाद दोनों पक्षों की ओर से अतिरिक्त व्यापारिक कदम सामने आए। तीखे राजनीतिक बयान भी विवाद का हिस्सा बने।

ऑटो और स्टील सेक्टर भी चिंता में

कनाडा ने ऑटो, स्टील और फॉरेस्ट्री जैसे क्षेत्रों को लेकर चिंता जाहिर की है। कनाडाई पक्ष का कहना है कि कुछ अमेरिकी मांगों से इन उद्योगों पर दबाव बढ़ सकता है।

फ्रेंच भाषा और सांस्कृतिक सुरक्षा जैसे मुद्दों को लेकर भी मतभेद सामने आए हैं। इसके अलावा भविष्य के व्यापार समझौतों की शर्तों को लेकर दोनों पक्षों की स्थिति अलग रही है।

’51वां राज्य’ टिप्पणी से बढ़ी नाराजगी

डोनाल्ड ट्रंप की कनाडा को अमेरिका का 51वां राज्य बनाने संबंधी टिप्पणियों ने भी विवाद को बढ़ाया है। कनाडा में इसके खिलाफ राजनीतिक और सार्वजनिक प्रतिक्रिया देखने को मिली है।

अमेरिकी उत्पादों के बहिष्कार और अमेरिका की यात्रा में कमी जैसी प्रतिक्रियाएं भी सामने आई हैं। कार्नी ने इन कदमों को कनाडा में बढ़ती राष्ट्रीय भावना से जोड़ा है।

आगे क्या होगा?

कनाडा पर ट्रंप का वार अब केवल टैरिफ तक सीमित नहीं दिख रहा है। दोनों देशों के बीच आर्थिक निर्भरता काफी गहरी है। इसलिए लंबे समय तक चलने वाला विवाद दोनों अर्थव्यवस्थाओं को प्रभावित कर सकता है।

कनाडा के लिए सबसे बड़ी चुनौती अमेरिकी बाजार पर निर्भरता घटाना है। इसके लिए यूरोप और अन्य अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अपनी मौजूदगी बढ़ानी होगी।

दूसरी ओर, अमेरिका और कनाडा के बीच बातचीत की संभावना भी बनी हुई है। आने वाले समय में दोनों पक्षों के फैसले व्यापारिक रिश्तों की दिशा तय करेंगे।

एक नजर में

  • अमेरिका: कनाडाई उत्पादों पर नए प्रतिबंध।
  • कनाडा: करीब 20 अरब डॉलर के अमेरिकी सामान पर टैरिफ।
  • कार्नी: आत्मनिर्भरता और व्यापार विविधीकरण पर जोर।
  • यूरोप: आर्थिक सहयोग बढ़ाने की तैयारी।
  • निर्यात: कनाडा के 70 प्रतिशत से ज्यादा निर्यात का लक्ष्य अमेरिका।
  • प्रमुख क्षेत्र: ऑटो, स्टील और फॉरेस्ट्री पर असर की चिंता।

कुल मिलाकर, कनाडा पर ट्रंप का वार दोनों देशों के बीच व्यापारिक रिश्तों के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। कनाडा ने जवाबी शुल्क लगाने के साथ अपनी रणनीति में बदलाव के संकेत दिए हैं। वहीं, यूरोप के साथ रिश्तों को मजबूत करने की कोशिश तेज हो सकती है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि दोनों देश बातचीत से समाधान निकालते हैं या व्यापारिक तनाव और बढ़ता है।

मुख्य बातें

  • कनाडाई डेयरी उत्पादों पर अमेरिका में प्रतिबंध की घोषणा।
  • ज्यादातर शराब और मोटरसाइकिलों पर भी कार्रवाई की तैयारी।
  • कनाडा ने करीब 20 अरब डॉलर के अमेरिकी सामान पर शुल्क लगाया।
  • कनाडाई कंपनियों को अमेरिकी सरकारी कॉन्ट्रैक्ट से बाहर करने की तैयारी।
  • प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने आत्मनिर्भरता को प्राथमिकता दी।
  • यूरोपीय संघ के साथ आर्थिक संबंध बढ़ाने पर विचार।
  • ऑटो, स्टील और फॉरेस्ट्री सेक्टर पर भी तनाव का असर।

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