CM साय का बड़ा निर्देश, मार्च 2028 तक जल कार्य होंगे पूरे

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छत्तीसगढ़ में पेयजल सुविधाओं को मजबूत करने की दिशा में सरकार तेजी से काम कर रही है। जल जीवन मिशन के लंबित कार्यों को तय समयसीमा में पूरा किया जाएगा। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने अधिकारियों को इस संबंध में जरूरी निर्देश दिए। उन्होंने कार्यों में गुणवत्ता और नियमित निगरानी पर विशेष जोर दिया।

10 सितंबर को रायपुर में उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित हुई। इसमें जल संसाधन और लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के अधिकारी शामिल हुए। बैठक में जल संचय अभियान की प्रगति की जानकारी ली गई। साथ ही, विभिन्न जिलों में चल रहे निर्माण कार्यों की समीक्षा हुई।

जल संरक्षण में बढ़ेगी जनभागीदारी

मुख्यमंत्री साय ने जल संरक्षण को सामूहिक जिम्मेदारी बताया। उन्होंने कहा कि सरकारी प्रयासों के साथ जनता की भागीदारी भी जरूरी है। जिलों को निर्धारित लक्ष्य से आगे बढ़कर काम करने के लिए प्रेरित किया गया।

कोरिया, धमतरी और राजनांदगांव के कार्यों को बैठक में सराहना मिली। इन जिलों के प्रभावी प्रयासों को अन्य क्षेत्रों में भी अपनाया जाएगा। इससे जल संरक्षण अभियान को प्रदेश स्तर पर मजबूती मिल सकती है।

अभियान से जुड़े कार्यों की नियमित समीक्षा करने के निर्देश दिए गए। वहीं, निर्माण में गुणवत्ता से किसी भी तरह का समझौता नहीं होगा। मुख्य सचिव स्तर पर भी प्रगति की निगरानी जारी रहेगी।

जल जीवन मिशन के लंबित कामों पर फोकस

जल जीवन मिशन के बाकी कार्यों को प्राथमिकता के साथ पूरा किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कलेक्टरों को नियमित समीक्षा करने कहा। तकनीकी और प्रशासनिक अड़चनों का तत्काल समाधान करने के निर्देश मिले।

सरकार का लक्ष्य केवल जल ढांचा तैयार करना नहीं है। ग्रामीण परिवारों को नियमित पेयजल सुविधा मिलना भी जरूरी है। इसलिए योजनाओं की उपयोगिता और संचालन पर भी ध्यान दिया जाएगा।

मार्च 2028 तक पूरी होंगी जल संरचनाएं

समीक्षा बैठक में जल संरचनाओं से जुड़े निर्माण कार्यों की स्थिति पर चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने मार्च 2028 तक सभी निर्धारित कार्य पूरे करने कहा। इसके लिए जिलों में प्रभावी मॉनिटरिंग व्यवस्था बनाने पर जोर दिया गया।

अधूरे कार्यों की वजहों को चिन्हित करने के निर्देश दिए गए। संबंधित अधिकारियों को समस्याओं का शीघ्र समाधान करना होगा। इससे परियोजनाओं को समय पर पूरा करने में मदद मिलेगी।

हर जिले में बनेगी जल सुरक्षा की कार्ययोजना

जल जीवन मिशन के साथ जल संरक्षण को भी प्राथमिकता दी जाएगी। प्रत्येक जिले की स्थानीय जरूरतों के अनुसार कार्ययोजना तैयार होगी। संबंधित विभाग मिलकर इन योजनाओं को आगे बढ़ाएंगे।

मुख्यमंत्री ने जल स्रोतों के संरक्षण को जरूरी बताया। उन्होंने भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर काम करने कहा। इससे ग्रामीण इलाकों में लंबे समय तक पेयजल उपलब्धता बनाए रखने में मदद मिलेगी।

पूर्ण कार्यों के भुगतान पर भी नजर

बैठक में पूरे हो चुके कार्यों के भुगतान की स्थिति की भी समीक्षा हुई। मुख्यमंत्री ने गुणवत्ता मानकों पर खरे उतरने वाले कार्यों का भुगतान समय पर करने कहा।

भुगतान प्रक्रिया में देरी से कई परियोजनाएं प्रभावित हो सकती हैं। इसलिए जिला स्तर पर लंबित भुगतान की निगरानी होगी। अधिकारियों को अनावश्यक देरी रोकने के निर्देश दिए गए।

अधिकारियों को दिए गए प्रमुख निर्देश

  • मार्च 2028 तक निर्धारित जल संरचनाएं पूरी की जाएंगी।
  • जल संचय अभियान की नियमित समीक्षा होगी।
  • जिलों में जल संरक्षण कार्यों को गति दी जाएगी।
  • गुणवत्तापूर्ण कार्यों का भुगतान समय पर किया जाएगा।
  • सफल जिलों के प्रभावी मॉडल अन्य क्षेत्रों में लागू होंगे।

बेहतर जल संरक्षण मॉडल बनाने की तैयारी

मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ जल संरक्षण के क्षेत्र में मिसाल कायम कर सकता है। इसके लिए सरकार और समाज दोनों को मिलकर प्रयास करना होगा। जल जीवन मिशन के प्रभावी क्रियान्वयन से ग्रामीण परिवारों को लाभ मिलेगा।

उन्होंने जिलों को स्थानीय परिस्थितियों के आधार पर रणनीति बनाने कहा। जल स्रोतों का संरक्षण और पुनर्जीवन इसमें अहम भूमिका निभाएगा। साथ ही, पेयजल योजनाओं की स्थायी उपयोगिता सुनिश्चित की जाएगी।

जल सुरक्षा के लिए इन क्षेत्रों पर रहेगा जोर

  • जल स्रोतों को संरक्षित और पुनर्जीवित किया जाएगा।
  • पेयजल योजनाओं की नियमित निगरानी होगी।
  • ग्रामीण परिवारों तक स्वच्छ पानी पहुंचाने पर ध्यान रहेगा।
  • तकनीकी समस्याओं का समय पर समाधान किया जाएगा।
  • विभागीय समन्वय को और मजबूत बनाया जाएगा।

जनभागीदारी से मजबूत होगा जल अभियान

जल संरक्षण से जुड़े अभियानों को जनभागीदारी के साथ आगे बढ़ाया जाएगा। जल जीवन मिशन के कार्यों में गुणवत्ता और समयसीमा दोनों पर निगरानी रहेगी।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को लक्ष्य आधारित कार्यप्रणाली अपनाने कहा। उन्होंने हर स्तर पर प्रगति की समीक्षा करने के निर्देश दिए। सरकार का उद्देश्य सुरक्षित पेयजल के साथ मजबूत जल सुरक्षा व्यवस्था तैयार करना है।

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