अक्षय कुमार और सैफ अली खान की जोड़ी लंबे समय बाद साथ दिखी है। दोनों कलाकार करीब 18 साल बाद एक फिल्म में नजर आए हैं। प्रियदर्शन ने इस फिल्म का निर्देशन किया है।
कहानी श्याम नाम के नेत्रहीन व्यक्ति से शुरू होती है। सैफ अली खान ने श्याम का किरदार निभाया है। वह एक सोसाइटी में मेंटेनेंस मैनेजर की नौकरी करता है।
श्याम जन्म से आंखों की रोशनी से वंचित है। हालांकि, उसकी सुनने और महसूस करने की क्षमता काफी तेज है। वह मार्शल आर्ट्स में भी माहिर है।
कहानी तब गंभीर हो जाती है, जब सोसाइटी के रिटायर्ड जज की हत्या होती है। इस हत्या के पीछे एक पुराना और खतरनाक मामला छिपा है।
पुराने फैसले से जुड़ी है पूरी कहानी
जज प्रधान का अतीत परशुराम नाम के व्यक्ति से जुड़ा है। अक्षय कुमार ने परशुराम की भूमिका निभाई है।
एक गलत फैसले के बाद परशुराम की जिंदगी बर्बाद हो जाती है। उसके परिवार पर भी इस फैसले का गहरा असर पड़ता है।
समय के साथ परशुराम बदले की भावना में डूब जाता है। जेल से बाहर आने के बाद वह जज से जुड़े लोगों को निशाना बनाता है।
अब जज की बेटी नंदिनी भी उसके निशाने पर है। श्याम को उसे सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी मिलती है।
सैफ अली खान ने छोड़ी मजबूत छाप
हैवान रिव्यू में सबसे ज्यादा तारीफ सैफ अली खान की परफॉर्मेंस की बनती है। उन्होंने श्याम के किरदार को काफी संयम के साथ निभाया है।
किरदार की शारीरिक गतिविधियों में नेत्रहीन व्यक्ति की झलक दिखाई देती है। वह आवाज और आहट के जरिए आसपास के खतरे को समझता है।
एक्शन दृश्यों में भी सैफ की बॉडी लैंग्वेज प्रभावी रहती है। उन्होंने किरदार को जरूरत से ज्यादा नाटकीय बनाने से बचाया है।
यही सादगी उनके अभिनय को ज्यादा विश्वसनीय बनाती है। कई कमजोर दृश्यों में भी सैफ फिल्म का प्रभाव बनाए रखते हैं।
अक्षय कुमार ने बदला अपना अंदाज
अक्षय कुमार इस फिल्म में नकारात्मक भूमिका में दिखाई देते हैं। परशुराम का लुक और व्यवहार उनके सामान्य किरदारों से अलग है।
शुरुआत में उनकी खामोशी डर पैदा करती है। उनकी आंखों और चेहरे के भाव किरदार की बेचैनी दिखाते हैं।
हालांकि, स्क्रिप्ट उनके किरदार को पर्याप्त विस्तार नहीं देती। कई जगह उनका प्रदर्शन सिर्फ हावभाव तक सीमित महसूस होता है।
कलाकारों की परफॉर्मेंस पर नजर:
- सैफ ने श्याम के किरदार में गहराई दिखाई है।
- अक्षय का विलेन अवतार शुरुआत में प्रभाव छोड़ता है।
- बोमन ईरानी ने जज की भूमिका को मजबूती दी है।
- सयामी खेर पुलिस अधिकारी के रूप में नजर आती हैं।
- असरानी की मौजूदगी फिल्म को खास भावनात्मक रंग देती है।
कमजोर स्क्रीनप्ले ने बिगाड़ा सस्पेंस
हैवान रिव्यू का सबसे कमजोर हिस्सा फिल्म का स्क्रीनप्ले है। फिल्म की लंबाई करीब 2 घंटे 44 मिनट है।
कहानी कई जगह जरूरत से ज्यादा खिंची हुई लगती है। कुछ घटनाओं का अंदाजा दर्शक पहले ही लगा सकते हैं।
पुलिस जांच को भी ज्यादा प्रभावशाली तरीके से पेश नहीं किया गया। कई घटनाएं सुविधानुसार आगे बढ़ती दिखाई देती हैं।
कॉमेडी भी कुछ जगह मुख्य सस्पेंस को कमजोर करती है। लव एंगल और अन्य सब-प्लॉट कहानी को भटकाते हैं।
प्रियदर्शन की कोशिश में नहीं आया पूरा संतुलन
प्रियदर्शन ने कहानी को बड़े स्तर पर पेश करने की कोशिश की है। फिल्म में कुछ अच्छे एक्शन और विजुअल सीक्वेंस देखने को मिलते हैं।
हालांकि, गंभीर कहानी के बीच कॉमेडी का इस्तेमाल हर जगह सफल नहीं रहता। कई दृश्यों में थ्रिल बनने से पहले ही माहौल हल्का हो जाता है।
फिल्म मलयालम की चर्चित फिल्म ‘ओप्पम’ से प्रेरित है। लेकिन हिंदी वर्जन में कहानी का ट्रीटमेंट काफी अलग नजर आता है।
मूल फिल्म की धीमी और गंभीर शैली के मुकाबले यहां मनोरंजन ज्यादा रखा गया है। इसका असर सस्पेंस की पकड़ पर पड़ता है।
सपोर्टिंग स्टारकास्ट ने निभाई अपनी भूमिका
बोमन ईरानी ने कहानी को जरूरी गंभीरता दी है। सयामी खेर की भूमिका भी कहानी को आगे बढ़ाती है।
मनोज जोशी, राजेश शर्मा और श्रीया पिलगांवकर ने अपनी भूमिकाएं निभाई हैं। राजपाल यादव और शारिब हाशमी कॉमेडी का हिस्सा बने हैं।
दिवंगत अभिनेता असरानी की मौजूदगी फिल्म को भावुक बनाती है। वहीं मोहनलाल का कैमियो दर्शकों के लिए खास सरप्राइज है।
फिल्म देखने से पहले इन पहलुओं पर ध्यान दें:
- फिल्म का सबसे मजबूत पक्ष सैफ की एक्टिंग है।
- अक्षय की भूमिका अलग और प्रयोगात्मक है।
- फिल्म में एक्शन के साथ कॉमेडी भी है।
- कहानी में कई ट्विस्ट आसानी से समझ आते हैं।
- सेकेंड हाफ में स्क्रीनप्ले कमजोर पड़ता है।
क्या थिएटर में पैसा खर्च करना सही है?
हैवान रिव्यू के आधार पर फिल्म को एक औसत थ्रिलर कहा जा सकता है। सैफ अली खान के प्रशंसकों के लिए यह अच्छी पसंद हो सकती है।
अक्षय कुमार का अलग रूप देखने के लिए भी फिल्म को मौका दिया जा सकता है। असरानी की मौजूदगी इसे भावनात्मक रूप से खास बनाती है।
हालांकि, मजबूत और लगातार सस्पेंस चाहने वाले दर्शकों को निराशा हो सकती है। कहानी के कुछ हिस्से अनुमान लगाने में ज्यादा मुश्किल नहीं हैं।
फिल्म की लंबाई भी इसके अनुभव को प्रभावित करती है। इसके बावजूद अभिनय और कुछ तकनीकी पक्ष इसे पूरी तरह कमजोर नहीं होने देते।
अभिनय बचाता है फिल्म का कमजोर लेखन
कुल मिलाकर, हैवान रिव्यू में फिल्म की सबसे बड़ी ताकत सैफ अली खान हैं। उनका किरदार कहानी के साथ दर्शकों का जुड़ाव बनाए रखता है।
अक्षय कुमार ने भी अलग भूमिका आजमाई है। लेकिन कमजोर लेखन के कारण उनका किरदार पूरी क्षमता से उभर नहीं पाता।
अगर आपको क्राइम थ्रिलर के साथ कॉमेडी पसंद है, तो फिल्म देख सकते हैं। वहीं गंभीर और लगातार रोमांच वाली कहानी पसंद करने वालों को सावधानी से फैसला करना चाहिए।

