छत्तीसगढ़ में खेती के नए मॉडल से बढ़ रही किसानों की आय

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छत्तीसगढ़ की कृषि व्यवस्था में अब तेजी से बदलाव दिखाई दे रहा है। धान के साथ किसान दूसरी लाभकारी फसलों की ओर बढ़ रहे हैं। अदरक, फूल, फल और सब्जियों की खेती को बढ़ावा मिल रहा है। इसके साथ मत्स्य पालन और पशुपालन भी ग्रामीण आय का जरिया बन रहे हैं।

किसानों की आय बढ़ाने के लिए खेती को बाजार से जोड़ने पर भी जोर दिया जा रहा है। आधुनिक तकनीक और बेहतर सिंचाई सुविधाएं इस बदलाव में अहम भूमिका निभा रही हैं।

धान के साथ बढ़ा फसल विविधीकरण

छत्तीसगढ़ की पहचान धान उत्पादन के कारण धान के कटोरे के रूप में रही है। अब किसान पारंपरिक खेती के साथ दूसरी फसलों का उत्पादन भी कर रहे हैं।

अदरक और गेंदा फूल जैसी फसलों से बेहतर बाजार मूल्य मिलने की संभावना रहती है। युवा किसान खेती के साथ मछली पालन और मुर्गी पालन भी अपना रहे हैं।

इससे एक ही खेत से कई तरह की आमदनी प्राप्त करने के अवसर बन रहे हैं। किसानों की आय में स्थिरता लाने के लिए यह मॉडल उपयोगी साबित हो सकता है।

उत्पादन बढ़ाने में आधुनिक तकनीक की भूमिका

राज्य में कृषि यंत्रीकरण का दायरा बढ़ रहा है। किसान ड्रोन और आधुनिक कृषि उपकरणों का इस्तेमाल कर रहे हैं। ऑटोमैटिक रीपर जैसे उपकरण श्रम और समय की बचत करते हैं।

फार्म मशीनरी बैंक भी छोटे किसानों के लिए उपयोगी साबित हो रहे हैं। यहां से किसान महंगी मशीनें किराये पर ले सकते हैं।

सूक्ष्म सिंचाई तकनीक से पानी की बचत भी हो रही है। ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई का विस्तार खेती की दक्षता बढ़ा रहा है।

किसानों की आय के लिए नई फसलों को प्रोत्साहन

फसल विविधीकरण को बढ़ावा देने के लिए किसानों को प्रोत्साहन राशि दी जा रही है। इसके तहत प्रति एकड़ 15 हजार रुपये तक सहायता का प्रावधान है।

अरहर, मूंग, उड़द और चना जैसी दलहन फसलें इसमें शामिल हैं। सोयाबीन, मूंगफली, सूरजमुखी और तिल जैसी तिलहन फसलों को भी बढ़ावा मिल रहा है।

मक्का, कपास और मोटे अनाजों की खेती भी प्रोत्साहित की जा रही है। कोदो, कुटकी, रागी और बाजरा इसके प्रमुख उदाहरण हैं।

योजनाओं से किसानों को मिल रही आर्थिक सुरक्षा

कृषक उन्नति योजना के जरिए किसानों को आर्थिक सहायता दी जा रही है। खरीफ 2023 से 2025 तक करीब 25.52 लाख किसानों को सहायता मिली।

इन किसानों के बैंक खातों में 35,892.90 करोड़ रुपये से अधिक ट्रांसफर किए गए। धान पर आदान सहायता के रूप में 24,73,762 किसानों को 13,289 करोड़ रुपये मिले।

गन्ना प्रोत्साहन योजना के तहत भी किसानों को भुगतान किया गया। 32,955 किसानों को 64.95 करोड़ रुपये की सहायता दी गई।

फसल बीमा के जरिए भी किसानों को जोखिम से सुरक्षा देने की कोशिश की जा रही है। इससे किसानों की आय पर प्राकृतिक आपदाओं के असर को कम करने में मदद मिलती है।

बागवानी क्षेत्र में बढ़ी संभावनाएं

छत्तीसगढ़ में बागवानी का क्षेत्र लगातार विस्तार कर रहा है। पिछले ढाई वर्षों में बागवानी क्षेत्र 8.42 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 8.91 लाख हेक्टेयर हुआ है।

फल, सब्जी, मसाले और फूलों की खेती का दायरा बढ़ा है। तेल पाम और बांस जैसी फसलों में भी संभावनाएं बढ़ रही हैं।

अब उत्पादन के साथ प्रसंस्करण और बाजार तक पहुंच जरूरी है। पैक हाउस और सेंटर ऑफ एक्सीलेंस जैसी सुविधाएं इसमें मदद कर सकती हैं।

कुल मिलाकर, खेती का बदलता स्वरूप ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा दे रहा है। आधुनिक तकनीक और विविध फसलों से किसानों की आय के नए रास्ते बन रहे हैं। बाजार से बेहतर जुड़ाव इस बदलाव को और मजबूत कर सकता है।

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