सर्प संरक्षण पहल: तपकरा में बनेगा अत्याधुनिक सर्प ज्ञान केंद्र, शोध और प्रशिक्षण को बढ़ावा

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जशपुर का तपकरा ‘नागलोक’ के नाम से प्रसिद्ध है।
अब यहां सर्पों से जुड़े संरक्षण कार्यों को नई दिशा मिलेगी।
वन विभाग ने सर्प ज्ञान केंद्र की योजना आगे बढ़ाई है।
इस संबंध में तपकरा रेस्ट हाउस में बैठक हुई।

बैठक में वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।
PCCF अरुण कुमार पाण्डेय ने बैठक का नेतृत्व किया।
CCF दिलराज प्रभाकर और DFO शशि कुमार मौजूद रहे।
डॉ. अजय कुमार शर्मा भी बैठक में शामिल हुए।
सर्प विशेषज्ञ आयुष मान शर्मा ने भी सुझाव दिए।

तपकरा में वैज्ञानिक अध्ययन को मिलेगा नया मंच

बैठक में तपकरा को विशेष अध्ययन केंद्र बनाने पर चर्चा हुई।
यहां सर्पों की प्रजातियों और व्यवहार पर शोध होगा।
स्थानीय स्तर पर जरूरी आंकड़े जुटाने की योजना है।

सर्प संरक्षण पहल में जनजागरूकता को भी प्राथमिकता मिलेगी।
सांपों से जुड़े अंधविश्वासों को वैज्ञानिक तथ्यों से दूर किया जाएगा।
स्कूली विद्यार्थियों के लिए जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
शोधार्थियों के लिए विशेष कार्यशालाएं भी प्रस्तावित हैं।

वन विभाग ने जैव विविधता में सर्पों की भूमिका बताई।
सर्प प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।
इसलिए उनके संरक्षण के लिए व्यवस्थित प्रयास जरूरी हैं।

सर्प मित्रों को मिलेगा विशेष प्रशिक्षण

ग्रामीण क्षेत्रों में सर्प मित्र अहम भूमिका निभाते हैं।
सांप निकलने पर वे रेस्क्यू कार्य में मदद करते हैं।
अब उन्हें मानक प्रक्रिया के तहत प्रशिक्षण दिया जाएगा।

प्रशिक्षण में विषैले सर्पों की पहचान सिखाई जाएगी।
गैर-विषैले सर्पों की पहचान भी समझाई जाएगी।
रेस्क्यू उपकरणों के सुरक्षित उपयोग की जानकारी मिलेगी।
प्राथमिक उपचार से जुड़े जरूरी तरीके भी बताए जाएंगे।

वन विभाग के साथ बेहतर समन्वय पर भी जोर रहेगा।
रेस्क्यू के दौरान इंसानों की सुरक्षा प्राथमिकता होगी।
साथ ही सांपों को नुकसान से बचाने पर जोर रहेगा।

योजना के दो प्रमुख पहलू

  • जागरूकता और वैज्ञानिक शिक्षा:
    लोगों को सर्पों से जुड़ी सही जानकारी दी जाएगी।
    अंधविश्वास और गलत धारणाओं को कम किया जाएगा।
    विद्यार्थियों को जैव विविधता के महत्व से जोड़ा जाएगा।
  • रेस्क्यू और वन्यजीव संरक्षण:
    सर्प मित्रों को मानक रेस्क्यू प्रक्रिया सिखाई जाएगी।
    आधुनिक उपकरणों के इस्तेमाल का प्रशिक्षण दिया जाएगा।
    रेस्क्यू के बाद सर्पों को सुरक्षित पर्यावास में छोड़ा जाएगा।

मानव-सर्प संघर्ष कम करने पर रहेगा फोकस

तपकरा में मानव और सर्पों के बीच संघर्ष कम करना जरूरी है।
इसके लिए जागरूकता और सुरक्षित रेस्क्यू व्यवस्था मजबूत होगी।
स्थानीय स्तर पर वन विभाग और सर्प मित्रों का तालमेल बढ़ेगा।

सर्प विशेषज्ञ आयुष मान शर्मा ने बैठक में रूपरेखा रखी।
उन्होंने शोध और डेटा संग्रह की जरूरत बताई।
फील्ड प्रशिक्षण को भी योजना में शामिल किया जाएगा।

सर्प संरक्षण पहल का उद्देश्य सुरक्षा और संरक्षण को साथ लाना है।
इसके तहत लोगों को जिम्मेदार व्यवहार के लिए प्रेरित किया जाएगा।
अभियान का संदेश होगा, “सर्पों से बचें एवं सर्पों को बचाएं।”

मध्य भारत के लिए मॉडल बन सकता है तपकरा

प्रस्तावित केंद्र को भविष्य में व्यापक स्वरूप मिल सकता है।
यहां शोध और प्रशिक्षण के साथ जागरूकता गतिविधियां होंगी।
इससे स्थानीय युवाओं और सर्प मित्रों को अवसर मिलेंगे।

सर्प संरक्षण पहल से सामुदायिक वन्यजीव प्रबंधन मजबूत हो सकता है।
तपकरा सरीसृप विज्ञान के अध्ययन का प्रमुख केंद्र बन सकता है।
इससे छत्तीसगढ़ की जैव विविधता को भी पहचान मिलेगी।

सर्प संरक्षण पहल का असर केवल तपकरा तक सीमित नहीं रहेगा।
वैज्ञानिक जानकारी बढ़ने से मानव-सर्प संघर्ष घटाने में मदद मिलेगी।
साथ ही सर्पों के प्रति संवेदनशीलता भी बढ़ेगी।

कुल मिलाकर, वन विभाग की योजना कई स्तरों पर अहम है।
इससे संरक्षण, शोध और प्रशिक्षण को एक मंच मिलेगा।
तपकरा भविष्य में मध्य भारत के लिए उदाहरण बन सकता है।

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