भारत-नेपाल रिश्ते: विदेश मंत्री खनाल ने बताई मौजूदा स्थिति, सहयोग पर दिया जोर

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न्यूयॉर्क में नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने भारत से संबंधों पर बात की। उन्होंने मौजूदा स्थिति को अच्छा बताया। खनाल ने सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया। व्यापार और ऊर्जा को उन्होंने अहम क्षेत्र बताया।

भारत के साथ रिश्तों पर खनाल की राय

शिशिर खनाल ने एशिया सोसाइटी के कार्यक्रम में बात रखी। उन्होंने दोनों देशों के संबंधों को बहुआयामी बताया। आर्थिक रिश्तों को भी उन्होंने महत्वपूर्ण बताया।

खनाल के अनुसार, दोनों देशों के सामाजिक संबंध मजबूत हैं। सांस्कृतिक जुड़ाव भी काफी पुराना है। हालांकि, राजनीतिक स्तर पर उतार-चढ़ाव आते रहे हैं।

उन्होंने व्यावहारिक सहयोग बढ़ाने की बात कही। उनका फोकस उपलब्ध अवसरों पर है। इससे आर्थिक साझेदारी को आगे बढ़ाया जा सकता है।

जयशंकर से न्यूयॉर्क में हुई मुलाकात

खनाल ने एस. जयशंकर से मुलाकात की जानकारी भी दी। यह बैठक संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान हुई। दोनों नेताओं ने कई मुद्दों पर चर्चा की।

बातचीत में द्विपक्षीय संबंधों पर विचार हुआ। आपसी हितों से जुड़े विषय भी उठे। विकास साझेदारी पर भी चर्चा हुई।

ऊर्जा सहयोग को लेकर भी बातचीत हुई। खनाल ने भारत की सहायता का आभार जताया। यह सहायता नेपाल में आई बाढ़ के बाद मिली थी।

भारत-नेपाल रिश्ते में ऊर्जा की अहमियत

नेपाल जलविद्युत को आर्थिक अवसर मानता है। खनाल ने करीब 43 गीगावाट क्षमता का उल्लेख किया। नेपाल अपनी बिजली उत्पादन क्षमता बढ़ाना चाहता है।

देश 2035 तक 28,000 मेगावाट का लक्ष्य देख रहा है। इसके लिए ऊर्जा क्षेत्र में निवेश जरूरी होगा। भारत को बिजली निर्यात बढ़ाने की भी योजना है।

नेपाल आगे बांग्लादेश तक बिजली पहुंचाना चाहता है। इससे क्षेत्रीय ऊर्जा कारोबार बढ़ सकता है। साथ ही, नेपाल को नए बाजार मिल सकते हैं।

नेपाल की भौगोलिक स्थिति और व्यापार

खनाल ने नेपाल की भौगोलिक स्थिति को अवसर बताया। उन्होंने भारत के साथ खुली सीमा का उल्लेख किया। यह सीमा 1,700 किलोमीटर से ज्यादा लंबी है।

यह सीमा पांच भारतीय राज्यों से जुड़ती है। इनमें उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश शामिल हैं। बिहार, पश्चिम बंगाल और सिक्किम भी जुड़े हैं।

भारत नेपाल का बड़ा व्यापारिक साझेदार है। इसलिए बाजार तक पहुंच अहम है। सड़क और रेल संपर्क इसमें मदद कर सकते हैं।

भारत और चीन के साथ नेपाल की नीति

नेपाल दोनों पड़ोसी देशों के साथ सहयोग चाहता है। खनाल ने व्यावहारिक नीति पर जोर दिया। उनका ध्यान आर्थिक अवसरों पर है।

उन्होंने उत्तर और दक्षिण संपर्क बढ़ाने की बात कही। नेपाल दोनों दिशाओं को विकास से जोड़ना चाहता है।

सड़क और डिजिटल नेटवर्क को भी विस्तार देना है। इसके अलावा, सुरंग और ड्राई पोर्ट की योजनाएं हैं। सीमा पार रेल संपर्क पर भी जोर है।

सहयोग के प्रमुख क्षेत्र

  • ऊर्जा उत्पादन बढ़ाने पर जोर रहेगा।
  • सीमा पार बिजली व्यापार को बढ़ाया जाएगा।
  • सड़क और रेल संपर्क मजबूत किए जाएंगे।
  • डिजिटल कनेक्टिविटी को बेहतर किया जाएगा।

नेपाल की आर्थिक प्राथमिकताएं

  • जलविद्युत क्षमता का बेहतर इस्तेमाल करना।
  • भारत को बिजली निर्यात बढ़ाना।
  • नए बाजारों तक ऊर्जा पहुंचाना।
  • व्यापारिक संपर्क को आसान बनाना।

कुल मिलाकर, भारत-नेपाल रिश्ते में आर्थिक सहयोग अहम है। खनाल ने व्यापार और ऊर्जा को प्राथमिकता दी। साथ ही, नेपाल चीन से भी संपर्क बढ़ाना चाहता है।

काठमांडो अपनी भौगोलिक स्थिति को अवसर मान रहा है। नेपाल क्षेत्रीय संपर्क बढ़ाने की दिशा में काम कर रहा है। ऊर्जा और व्यापार इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

 

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