यूपीएससी के 100 साल पूरे, पीएम मोदी ने भर्ती पर दिया संदेश

CG DARSHAN
CG DARSHAN 6 Min Read
6 Min Read
Advertisement Carousel

संघ लोक सेवा आयोग यानी UPSC ने अपनी स्थापना के 100 साल पूरे किए हैं। UPSC शताब्दी समारोह का आयोजन नई दिल्ली के भारत मंडपम में हुआ। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कार्यक्रम को संबोधित किया। उन्होंने आयोग की लंबी यात्रा और भूमिका का उल्लेख किया।

प्रधानमंत्री ने कहा कि समय के साथ कई बदलाव हुए हैं। पीढ़ियां बदलीं और तकनीक का स्वरूप भी बदला। सरकारी कामकाज और पाठ्यक्रम में भी बदलाव आया। इसके बावजूद आयोग के प्रति भरोसा बना हुआ है।

विरासत और युवाओं की आकांक्षाओं पर जोर

पीएम मोदी ने कहा कि यह केवल 100 साल पूरे होने का अवसर नहीं है। यह संस्था की विरासत को याद करने का मौका भी है। उन्होंने युवाओं की आकांक्षाओं का भी उल्लेख किया। हर साल लाखों युवा सरकारी सेवाओं में जाने का प्रयास करते हैं।

प्रधानमंत्री ने आयोग से जुड़े लोगों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने संस्था की ऐतिहासिक यात्रा को महत्वपूर्ण बताया। साथ ही, सार्वजनिक सेवा की जिम्मेदारी पर जोर दिया।

नेताजी सुभाष चंद्र बोस का किया उल्लेख

समारोह में प्रधानमंत्री ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि 1920 में नेताजी इसी चयन प्रक्रिया से गुजरे थे। उस समय संस्कृत का पेपर भी परीक्षा का हिस्सा था।

पीएम मोदी ने कहा कि नेताजी ने संस्कृत में परीक्षा दी थी। उन्होंने इस ऐतिहासिक प्रसंग को आयोग की पुरानी यात्रा से जोड़ा। इससे प्रतियोगी परीक्षाओं के बदलते स्वरूप की झलक मिलती है।

सरदार पटेल के योगदान को किया याद

प्रधानमंत्री ने सरदार वल्लभभाई पटेल के योगदान को भी याद किया। उन्होंने कहा कि आजादी के बाद देश को चलाना बड़ी चुनौती थी। प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करना भी जरूरी था।

पीएम मोदी के अनुसार, सरदार पटेल ने प्रशासनिक ढांचे को मजबूती दी। उन्होंने सार्वजनिक संस्थाओं को मजबूत बनाने में भूमिका निभाई। आयोग को भी स्वतंत्र भारत के महत्वपूर्ण स्तंभों में गिना गया।

UPSC शताब्दी में भर्ती प्रक्रिया पर चर्चा

प्रधानमंत्री ने भविष्य की भर्ती प्रक्रिया को लेकर सुझाव दिए। उन्होंने कहा कि नए अधिकारी विकसित भारत के निर्माण में भूमिका निभाएंगे। इसलिए चयन प्रक्रिया में कुछ मूल कसौटियों पर ध्यान जरूरी है।

उन्होंने दो प्राथमिकताओं का उल्लेख किया। इनमें देश पहले और नागरिक पहले शामिल हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि चयन में इन दोनों बातों को महत्व मिलना चाहिए।

ज्ञान के साथ सेवा भावना भी जरूरी

पीएम मोदी ने भर्ती परीक्षा के उद्देश्य पर भी बात की। उनके अनुसार, परीक्षा केवल उम्मीदवार के ज्ञान को नहीं परखे। यह भी समझना जरूरी है कि युवा सिविल सेवा में क्यों आना चाहता है।

उन्होंने सार्वजनिक पद और सार्वजनिक सेवा के बीच अंतर पर जोर दिया। उनके अनुसार, युवाओं में सेवा की भावना को महत्व मिलना चाहिए। इससे प्रशासन में जिम्मेदारी की भावना मजबूत हो सकती है।

स्मारक सिक्का और डाक टिकट जारी

समारोह के दौरान UPSC शताब्दी के अवसर पर स्मारक सिक्का जारी किया गया। इसके साथ स्मारक डाक टिकट भी जारी हुआ। एक विशेष पुस्तक का भी विमोचन किया गया।

इस पुस्तक का नाम ‘100 Landmark Judgements’ है। इसमें UPSC और लोक सेवा आयोगों से जुड़े महत्वपूर्ण फैसलों का संकलन है। कार्यक्रम में देशभर से कई अधिकारी और विशेषज्ञ शामिल हुए।

देशभर के प्रतिनिधियों की रही भागीदारी

समारोह में राज्य लोक सेवा आयोगों के अध्यक्ष और सदस्य शामिल हुए। केंद्र सरकार के वरिष्ठ अधिकारी भी कार्यक्रम में मौजूद रहे। शिक्षाविदों और UPSC अधिकारियों ने भी हिस्सा लिया।

दो दिवसीय कार्यक्रम में विभिन्न विषयों पर चर्चा हुई। इसमें लोक सेवा व्यवस्था और भर्ती से जुड़े मुद्दे शामिल रहे। आयोग की ऐतिहासिक यात्रा पर भी विचार किया गया।

सार्वजनिक सेवा के लिए युवाओं को संदेश

प्रधानमंत्री के संबोधन में युवाओं और भर्ती प्रक्रिया पर विशेष जोर रहा। UPSC शताब्दी के अवसर पर उन्होंने सेवा भावना को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि चयनित युवा देश और नागरिकों की जिम्मेदारी समझें।

उन्होंने बदलते समय के साथ भर्ती प्रक्रिया को प्रासंगिक बनाए रखने की बात रखी। साथ ही, सार्वजनिक सेवा के मूल उद्देश्य को केंद्र में रखने का संदेश दिया।

समारोह से जुड़े प्रमुख बिंदु

  • यूपीएससी ने स्थापना के 100 साल पूरे किए।
  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने समारोह को संबोधित किया।
  • कार्यक्रम भारत मंडपम, नई दिल्ली में आयोजित हुआ।
  • स्मारक सिक्का और डाक टिकट जारी किए गए।
  • ‘100 Landmark Judgements’ पुस्तक का विमोचन हुआ।

भर्ती प्रक्रिया को लेकर पीएम का संदेश

  • चयन में देश और नागरिक को प्राथमिकता देने की बात कही गई।
  • परीक्षा में ज्ञान के साथ सेवा भावना पर जोर दिया गया।
  • युवाओं के सार्वजनिक सेवा से जुड़ने की आवश्यकता बताई गई।
  • सिविल सेवा में आने के उद्देश्य को भी समझने की बात कही गई।
  • भविष्य के अधिकारियों को राष्ट्र निर्माण में भूमिका निभाने का संदेश दिया गया।

 

यह भी पढ़ें: स्मित मच्छार की बहादुरी को मिली अंतरराष्ट्रीय पहचान, दुनिया ने सराहा  

Share This Article
Leave a comment