रायपुर। नागरिकों की समस्याओं का समय पर निपटारा सुशासन का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसी उद्देश्य से शिकायत समाधान की प्रक्रिया को कार्रवाई और फीडबैक से जोड़ा गया है। कोरबा में स्ट्रीट लाइट से जुड़ी शिकायत पर त्वरित कार्रवाई इसका उदाहरण बनी। समस्या दूर होने के बाद नागरिक से संतुष्टि की पुष्टि भी की गई।
बंद स्ट्रीट लाइट से परेशान थे स्थानीय नागरिक
कोरबा जिले के वार्ड क्रमांक 12 की नई बस्ती में स्ट्रीट लाइट बंद थी। यह क्षेत्र पुराना बस स्टैंड के आसपास स्थित है। रात में रोशनी नहीं होने से लोगों को आवागमन में परेशानी हो रही थी।
स्थानीय निवासी मोहम्मद रियाज ने 10 सितंबर 2026 को शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने क्षेत्र में अंधेरे की समस्या की जानकारी प्रशासन तक पहुंचाई। शिकायत में स्ट्रीट लाइट जल्द चालू कराने की मांग की गई थी।
शिकायत मिलने के बाद इसे संबंधित निगम प्रशासन को भेजा गया। निगम की टीम ने मौके पर जाकर स्थिति की जांच की। जांच के बाद खराब लाइट की मरम्मत कर उसे दोबारा चालू किया गया।
शिकायत समाधान के बाद लिया गया नागरिक का फीडबैक
स्ट्रीट लाइट ठीक होने के बाद शिकायतकर्ता से संपर्क किया गया। उनसे कार्रवाई के संबंध में प्रतिक्रिया ली गई। मोहम्मद रियाज ने समस्या दूर होने पर संतुष्टि जताई।
इसके बाद शिकायत को बंद किया गया। इससे शिकायत समाधान की प्रक्रिया में नागरिक की प्रतिक्रिया का महत्व सामने आता है। यानी कार्रवाई के बाद समाधान की पुष्टि भी की जा रही है।
शिकायत से लेकर कार्रवाई तक होती है निगरानी
शिकायत दर्ज होने के बाद उसे संबंधित विभाग तक पहुंचाया जाता है। इसके बाद विभागीय अधिकारी समस्या के अनुसार कार्रवाई करते हैं। समाधान होने पर उसकी स्थिति की जानकारी दर्ज की जाती है।
इस पूरी प्रक्रिया में शिकायतकर्ता के फीडबैक को भी शामिल किया जाता है। इससे यह जानने में मदद मिलती है कि समस्या वास्तव में दूर हुई है या नहीं। नागरिक की संतुष्टि के बाद शिकायत बंद करने की व्यवस्था अपनाई जा रही है।
शिकायत समाधान की यह प्रक्रिया केवल समस्या दूर करने तक सीमित नहीं है। इसके जरिए संबंधित विभागों की जवाबदेही भी तय होती है। इससे शासन और नागरिकों के बीच संवाद मजबूत करने में मदद मिलती है।
सीएम हेल्पलाइन बनी शिकायतों के लिए सीधा माध्यम
सीएम हेल्पलाइन 1076 के जरिए नागरिक अपनी समस्याएं शासन-प्रशासन तक पहुंचा सकते हैं। शिकायत मिलने के बाद उसे संबंधित विभाग के स्तर पर भेजा जाता है। इससे स्थानीय समस्याओं पर कार्रवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ती है।
कोरबा की स्ट्रीट लाइट का मामला इसी व्यवस्था का उदाहरण है। इसमें शिकायत दर्ज होने से लेकर मरम्मत और फीडबैक तक पूरी प्रक्रिया पूरी हुई।
शिकायत समाधान के बाद नागरिक की संतुष्टि को प्राथमिकता देना महत्वपूर्ण कदम है। इससे शिकायतों के निपटारे की गुणवत्ता पर भी ध्यान रहता है।
कुल मिलाकर, कोरबा की यह घटना प्रशासनिक जवाबदेही की प्रक्रिया को दर्शाती है। समस्या सामने आने के बाद संबंधित विभाग ने कार्रवाई की। वहीं, नागरिक की संतुष्टि के बाद शिकायत को अंतिम रूप से बंद किया गया।
शिकायत समाधान से जुड़ी यह प्रक्रिया नागरिकों और प्रशासन के बीच विश्वास को मजबूत करने में सहायक हो सकती है। शिकायत, कार्रवाई और फीडबैक का यह क्रम सुशासन की दिशा में महत्वपूर्ण है।

