महानदी जल संरक्षण पर सीएम साय ने दिया जनभागीदारी का संदेश

CG DARSHAN
4 Min Read
4 Min Read

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय 14 अक्टूबर 2026 को शिवरीनारायण पहुंचे। उन्होंने महानदी तट पर आयोजित चित्रोत्पला गंगा महाआरती में भाग लिया।

मुख्यमंत्री अपनी पत्नी कौशल्या देवी साय के साथ पूजा में शामिल हुए। उन्होंने प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की।

इस धार्मिक आयोजन में दीपों की रोशनी और वैदिक मंत्रोच्चार से भक्तिमय माहौल बना। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर जल स्रोतों को बचाने की अपील भी की।

महानदी छत्तीसगढ़ की आस्था और जीवनरेखा

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने महानदी को छत्तीसगढ़ की जीवनदायिनी बताया। उन्होंने कहा कि नदी प्रदेश की संस्कृति, सभ्यता और जनजीवन से जुड़ी है।

महानदी कृषि और स्थानीय अर्थव्यवस्था को सहारा देती है। इसके तटों पर कई सांस्कृतिक और धार्मिक परंपराएं विकसित हुई हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि नदियों के प्रति श्रद्धा तभी सार्थक होगी, जब लोग उनकी स्वच्छता और सुरक्षा का ध्यान रखेंगे। इसलिए महानदी जल संरक्षण को सामूहिक जिम्मेदारी के रूप में अपनाना जरूरी है।

शिवरीनारायण की सांस्कृतिक पहचान को बढ़ावा

मुख्यमंत्री ने शिवरीनारायण महोत्सव और शारदीय नवरात्रि की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने माता शबरी की पावन नगरी की धार्मिक महत्ता का उल्लेख किया।

यहां आयोजित महाआरती ने श्रद्धालुओं को एक साथ जुड़ने का अवसर दिया। ऐसे आयोजन क्षेत्र की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक पहचान को आगे बढ़ाते हैं।

जल संचय को जनआंदोलन बनाने की जरूरत

मुख्यमंत्री ने कहा कि पानी जीवन का आधार है। आने वाली पीढ़ियों के लिए जल संसाधनों को सुरक्षित रखना सभी का दायित्व है।

उन्होंने वर्षा जल की हर बूंद सहेजने का आह्वान किया। साथ ही, गांवों और शहरों में जल संचय की व्यवस्था विकसित करने पर जोर दिया।

घर, सार्वजनिक भवन और अन्य परिसरों में वर्षा जल संचय उपयोगी साबित हो सकता है। इससे बारिश के पानी को सहेजने और भूजल स्तर बढ़ाने में मदद मिल सकती है।

जल संचय अभियान में जनभागीदारी का महत्व

मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में चल रहे जल संचय-जनभागीदारी अभियान का उल्लेख किया। इस पहल के माध्यम से वर्षा जल बचाने और भूजल स्तर सुधारने के प्रयास किए जा रहे हैं।

उन्होंने नागरिकों से जल संरक्षण को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने की अपील की। इस दिशा में महानदी जल संरक्षण के साथ तालाबों, कुओं और अन्य जल स्रोतों की देखभाल भी जरूरी है।

जल स्रोतों को बचाने के लिए जरूरी कदम

जल संरक्षण के लिए सरकारी प्रयासों के साथ आम लोगों की भागीदारी भी आवश्यक है। छोटे कदम मिलकर पानी की बर्बादी रोकने में मदद कर सकते हैं।

हर परिवार अपना सकता है ये उपाय

  • घरों में वर्षा जल संचय की व्यवस्था करें।
  • तालाबों, कुओं और नदियों में कचरा न डालें।
  • पानी का उपयोग जरूरत के अनुसार करें।
  • सार्वजनिक स्थानों पर जल संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाएं।
  • स्थानीय समुदाय के साथ मिलकर जल स्रोतों की देखभाल करें।

आने वाली पीढ़ियों के लिए जल बचाना जरूरी

शिवरीनारायण में आयोजित चित्रोत्पला गंगा महाआरती ने धार्मिक आस्था के साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया। मुख्यमंत्री ने जल स्रोतों की सुरक्षा को सभी की जिम्मेदारी बताया।

महानदी जल संरक्षण का उद्देश्य केवल पानी बचाना नहीं, बल्कि भविष्य के लिए जल संसाधनों को सुरक्षित रखने की सोच को मजबूत करना भी है। जनभागीदारी से वर्षा जल संचय और नदी संरक्षण के प्रयासों को व्यापक बनाया जा सकता है।

Share This Article
Leave a Comment