छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र में नक्सल हिंसा से प्रभावित लोगों के पुनर्वास के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि पीड़ितों को सम्मानजनक जीवन देना सरकार की जिम्मेदारी है। उन्होंने प्रभावित परिवारों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए केंद्र और राज्य सरकार के सहयोग पर जोर दिया।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने भी बस्तर में विकास और समृद्धि को गति देने की बात कही। उन्होंने कहा कि अब दूरस्थ क्षेत्रों तक सुविधाएं पहुंचाने और स्थानीय लोगों के लिए नए अवसर तैयार करने पर ध्यान दिया जाएगा।
दंतेवाड़ा में तीन दिवसीय सहायता शिविर
दंतेवाड़ा में 15 से 17 अक्टूबर 2026 तक निःशुल्क दिव्यांगजन सहायता शिविर आयोजित किया जा रहा है। इसमें 768 दिव्यांगजनों को कृत्रिम अंग और विभिन्न सहायक उपकरण दिए जाएंगे।
जिलेवार लाभार्थियों का विवरण इस प्रकार है:
- दंतेवाड़ा: 509 दिव्यांगजन
- बीजापुर: 197 दिव्यांगजन
- सुकमा: 62 दिव्यांगजन
इस शिविर का आयोजन भगवान महावीर विकलांग सहायता समिति, जयपुर और सहयोगी संस्थाओं के सहयोग से किया जा रहा है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कार्यक्रम में शामिल हुए।
अमित शाह ने पीड़ितों के पुनर्वास को बताया प्राथमिकता
अमित शाह ने कहा कि नक्सली हिंसा ने दशकों तक बस्तर के गरीब और आदिवासी परिवारों को प्रभावित किया। आईईडी विस्फोटों जैसी घटनाओं में कई निर्दोष नागरिक दिव्यांग हुए। अब प्रभावित लोगों को सहायता देकर उनके जीवन को सुगम बनाने की जरूरत है।
उन्होंने भरोसा जताया कि केंद्र सरकार इस काम में छत्तीसगढ़ सरकार को पूरा सहयोग देगी। पुनर्वास के साथ पीड़ितों को आत्मनिर्भर बनाने और सम्मान के साथ जीवन जीने के अवसर उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया गया।
जगदलपुर में 3,600 से अधिक दिव्यांगजनों को मिला लाभ
इससे पहले 5 से 7 अक्टूबर 2026 तक जगदलपुर में सहायता शिविर आयोजित किया गया था। उसमें 3,600 से अधिक दिव्यांगजन लाभान्वित हुए थे। इनमें बस्तर क्षेत्र के 1,570 से अधिक लोग शामिल थे।
इन शिविरों के माध्यम से जरूरतमंद लोगों को कृत्रिम अंग और सहायक उपकरण उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इससे उन्हें रोजमर्रा के काम करने और अधिक आत्मनिर्भर बनने में सहायता मिल सकती है।
सुरक्षा शिविरों को सेवा केंद्र बनाने की योजना
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि नक्सलमुक्त बस्तर में विकास कार्यों को गति देना सरकार की प्राथमिकता है। ‘नियद नेल्लानार’ योजना के जरिए दूरस्थ क्षेत्रों तक विकास सुविधाएं पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि बस्तर के 200 से अधिक सुरक्षा शिविरों को ‘शहीद वीर गुंडाधुर सेवा डेरा’ के रूप में विकसित करने की योजना है। इन केंद्रों के जरिए स्थानीय लोगों को सरकारी सेवाओं, रोजगार और स्वरोजगार से जोड़ने पर ध्यान दिया जाएगा।
इस पहल का उद्देश्य सुरक्षा शिविरों को जनसेवा और विकास के केंद्रों में बदलना है। इससे दूरस्थ गांवों के लोगों को सुविधाओं तक पहुंच बनाने में मदद मिल सकती है।
पुनर्वास और विकास से खुलेगा आगे बढ़ने का रास्ता
बस्तर में हिंसा से प्रभावित परिवारों को सहायता देना और स्थानीय विकास के अवसर बढ़ाना इस पहल के प्रमुख उद्देश्य हैं। दिव्यांगजनों को जरूरी उपकरण देने के साथ उन्हें आत्मनिर्भर जीवन जीने में सहयोग दिया जा रहा है।
बस्तर पुनर्वास अभियान के माध्यम से प्रभावित लोगों की जरूरतों पर ध्यान देने और उन्हें सम्मानजनक जीवन के अवसर उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है। रोजगार, स्वरोजगार और बुनियादी सुविधाओं के विस्तार से क्षेत्र के विकास को भी गति मिल सकती है।

