रावी की बाढ़ से उजड़ा कोटली खेहरा: घर-खेत डूबे, गाद और बीमारी का खतरा

कोटली खेहरा की त्रासदी: रावी बाढ़ से तबाही के बाद गाद और महामारी का संकट

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अमृतसर का सीमांत गांव कोटली खेहरा आज भी रावी नदी की बाढ़ के जख्मों से कराह रहा है। धुस्सी बांध टूटने से गांव के घर और खेत पूरी तरह जलमग्न हो गए। सरकारी स्कूल और डिस्पेंसरी टापू जैसे दिख रहे हैं, जबकि खेल का मैदान अब गंदे तालाब में बदल चुका है।

🌊 रावी का कहर: पलभर में तबाही

गांव के बुजुर्ग हरमिंदर सिंह याद करते हुए कहते हैं कि जब रावी का पानी गांव में आया तो चार फीट ऊंचा जलभराव हो गया। ग्रामीण बच्चों और जानवरों को लेकर ऊंची जगहों पर भागे। खेत, घर और सामान सबकुछ डूब गया। उनकी आवाज में अब भी दर्द और लाचारी झलकती है।

🦟 गाद और गंदगी से बढ़ी मुश्किलें

पानी का स्तर अब ढाई से तीन फीट रह गया है, लेकिन इसके साथ आई गाद और गंदगी ने जीवन को और कठिन बना दिया है। बदबूदार माहौल, सड़ा हुआ अनाज और ठहरा हुआ पानी ग्रामीणों के लिए अभिशाप बन चुका है। दिन में मक्खियां और रात में मच्छरों का आतंक नींद तक छीन लेता है।

⚠️ संक्रामक बीमारियों का खतरा

ग्रामीण बलबीर सिंह बताते हैं कि बाढ़ का पानी उतरने के बाद अब सबसे बड़ी चिंता महामारी फैलने की है। ठहरे पानी से मलेरिया, डेंगू और अन्य बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। प्रशासन और ग्रामीण मिलकर टूटी नहर को ठीक करने में जुटे हैं, लेकिन राहत की राह लंबी है।

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