पश्चिम एशिया इस समय गंभीर सैन्य टकराव के दौर से गुजर रहा है। अमेरिका और इस्राइल द्वारा ईरान पर किए गए बड़े हमलों के बाद क्षेत्र में युद्ध जैसे हालात बन गए हैं। बीते सात दिनों में यह संघर्ष लगातार गहराता गया है और इसके असर अब पूरी दुनिया में महसूस किए जा रहे हैं।
इस युद्ध में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत की खबर ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हलचल मचा दी है। वहीं ईरान में हजारों नागरिकों के हताहत होने की जानकारी सामने आ रही है। जवाबी कार्रवाई में ईरान ने रणनीतिक रूप से बेहद अहम समुद्री मार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद कर दिया, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति प्रभावित हुई और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों में तेज उछाल देखने को मिला।
28 फरवरी: संघर्ष की शुरुआत
28 फरवरी को अमेरिका और इस्राइल ने संयुक्त सैन्य कार्रवाई करते हुए ईरान के कई सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। इस ऑपरेशन में अत्याधुनिक लड़ाकू विमान और भारी मिसाइलों का इस्तेमाल किया गया। अमेरिका ने इस अभियान को “एपिक फ्यूरी” जबकि इस्राइल ने “रोरिंग लायन” नाम दिया।
1 मार्च: जवाबी हमले और बढ़ता तनाव
दूसरे दिन युद्ध और तीखा हो गया। अमेरिका ने दावा किया कि उसने ईरान के कई नौसैनिक जहाजों को डुबो दिया और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर के ठिकानों को नुकसान पहुंचाया। इसके जवाब में ईरान ने कुवैत स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डे पर ड्रोन हमला किया, जिसमें कई सैनिकों की मौत हुई।
2 मार्च: युद्ध का विस्तार
तीसरे दिन यह संघर्ष लेबनान तक फैल गया। हिजबुल्ला ने इस्राइल पर मिसाइलें दागीं, जिसके बाद इस्राइल ने बेरूत में बड़े पैमाने पर हवाई हमले किए। इसी दौरान ईरान ने सऊदी अरब की रास तनुरा तेल रिफाइनरी को निशाना बनाकर ऊर्जा आपूर्ति पर दबाव बनाने की कोशिश की।
3 मार्च: रणनीतिक मोर्चों पर टकराव
चौथे दिन अमेरिका ने बंकर नष्ट करने वाले हथियारों से लैस बी-2 बॉम्बर तैनात किए। इस्राइल ने ईरान और हिजबुल्ला के ठिकानों पर हमले जारी रखे। इसी बीच ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद कर वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति पर बड़ा दबाव बना दिया।
4 मार्च: समुद्री क्षेत्र में बड़ा घटनाक्रम
पांचवें दिन हिंद महासागर में एक बड़ा सैन्य घटनाक्रम हुआ। अमेरिकी पनडुब्बी ने ईरान के युद्धपोत आईआरआईएस देना को टॉरपीडो से निशाना बनाकर डुबो दिया। यह जहाज भारत में आयोजित नौसैनिक अभ्यास से लौट रहा था और श्रीलंका के पास मौजूद था। इस हमले में कई ईरानी नाविकों की मौत हुई, जबकि कुछ को बचा लिया गया।
ड्रोन और मिसाइल हमलों से बढ़ता खतरा
ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए खाड़ी क्षेत्र के कई अमेरिकी और सहयोगी ठिकानों को निशाना बनाया। सऊदी अरब, कुवैत और संयुक्त अरब अमीरात में कई मिसाइल और ड्रोन हमले हुए, हालांकि कई हमलों को एयर डिफेंस सिस्टम ने हवा में ही नष्ट कर दिया।
क्या किसी पक्ष को मिल रही बढ़त?
अब तक के घटनाक्रम से यह स्पष्ट है कि दोनों पक्ष सैन्य शक्ति का व्यापक इस्तेमाल कर रहे हैं। अमेरिका और इस्राइल तकनीकी और रणनीतिक दृष्टि से मजबूत हैं, जबकि ईरान क्षेत्रीय सहयोगियों और समुद्री मार्गों के जरिए दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है।
कितना लंबा चल सकता है युद्ध?
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जल्द कूटनीतिक प्रयास सफल नहीं हुए तो यह संघर्ष लंबे समय तक जारी रह सकता है। इसके क्षेत्रीय युद्ध में बदलने की आशंका भी जताई जा रही है, जिससे वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।

