रायपुर। राज्य में बढ़ते नशाखोरी के खतरे पर लगाम कसने के लिए मुख्यमंत्री ने आज आयोजित कलेक्टर-एसपी बैठक में व्यापक और समन्वित कार्रवाई के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि नशे का अवैध कारोबार न केवल सार्वजनिक स्वास्थ्य को चोट पहुँचाता है, बल्कि अन्य अपराधों—चोरी, लूट, सड़क हादसों और संगठित अपराध—को भी बढ़ावा देता है। इसलिए प्रशासन, पुलिस और समाज—तीनों स्तरों पर समन्वित अभियान चलाया जाए।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि अंतरराज्यीय सीमावर्ती क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाना प्राथमिकता होगी। इसके लिए संयुक्त चेक-पोस्ट, ड्रोन/सीसीटीवी सर्विलांस, मुखबिर नेटवर्क का सुदृढ़ीकरण और रियल-टाइम इंटेलिजेंस शेयरिंग की व्यवस्था बनाने के निर्देश दिए गए। जिलों को कहा गया है कि अंतरराज्यीय समन्वय बैठकों को मासिक चक्र में नियमित किया जाए ताकि सप्लाई चेन पर शुरुआती चरण में ही रोक लग सके।
बैठक में PITNDPS एक्ट के मामलों में समयबद्ध कार्रवाई पर विशेष जोर दिया गया। केस डायरी की समयसीमा, जब्ती-पंचनामा की गुणवत्ता, फॉरेंसिक रिपोर्ट की शीघ्रता और अभियोजन समन्वय पर स्पष्ट मानक तय करने को कहा गया। जिलों को निर्देशित किया गया कि विशेष निगरानी में रखे जाने वाले व्यक्तियों की सूची का त्रैमासिक ऑडिट किया जाए और अनुपालन रिपोर्ट मुख्यालय को भेजी जाए।
जनजागरूकता और युवाओं की भागीदारी बैठक का दूसरा बड़ा फोकस रहा। मुख्यमंत्री ने कहा कि स्कूल-कॉलेज, औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान और खेल क्लबों में नशा-विरोधी जागरूकता को नियमित गतिविधि बनाया जाए। जिला जनसंपर्क, शिक्षा और खेल विभाग के साथ एनजीओ/स्वयंसेवी संगठनों की भागीदारी से काउंसलिंग कैंप, हेल्पलाइन प्रचार और सोशल मीडिया-रील अभियान चलाया जाएगा।
प्रशासनिक स्तर पर निम्न कदम तुरंत लागू करने को कहा गया:
-
हॉटस्पॉट मैपिंग: पिछले 24 महीनों के केस-डेटा से सप्लाई रूट, हॉटस्पॉट बाजार और वितरण कड़ियों की पहचान।
-
संयुक्त छापे: पुलिस, एक्साइज, एनसीबी और डीआरआइ के साथ तालमेल कर इंटरडिक्शन ड्राइव।
-
फास्ट-ट्रैक समन्वय: केस-फ़ाइलिंग और चार्जशीट में देरी रोकने हेतु साप्ताहिक रिव्यू मीटिंग।
-
समुदाय साझेदारी: अभिभावक-टीचर मीट, मोहल्ला समितियाँ और धार्मिक/सामुदायिक मंचों के माध्यम से संवाद।
अंत में मुख्यमंत्री ने कहा, “नशाखोरी के खिलाफ लड़ाई कानून-व्यवस्था, स्वास्थ्य और समाज—तीनों की साझा जिम्मेदारी है। हम कठोर कानून, तेज़ कार्रवाई और संवेदनशील जागरूकता—तीनों मोर्चों पर साथ-साथ काम करेंगे।”
