संसद के शीतकालीन सत्र की शुरुआत बेहद तूफानी रही। एसआईआर मुद्दे को लेकर विपक्ष ने शुरुआत से ही तीखा विरोध जताया, जिससे सदन में जोरदार हंगामा हुआ। भारी शोरगुल के कारण लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक स्थगित करने का निर्णय लेना पड़ा। 19 दिनों तक चलने वाले इस सत्र में 10 से अधिक नए विधेयकों के पेश होने की संभावना है, लेकिन पहले दिन का माहौल राजनीतिक टकराव से भरा रहा।
राज्यसभा में पहली बार सभापति के रूप में उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने कार्यवाही का संचालन किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनकी प्रशंसा करते हुए कहा कि एक किसान परिवार से उठकर राष्ट्रीय नेतृत्व तक पहुंचना प्रेरणादायक है। उन्होंने कहा कि राधाकृष्णन का पूरा जीवन समाज सेवा के लिए समर्पित रहा है और सदन की गरिमा बनाए रखना सभी सांसदों की सामूहिक जिम्मेदारी है।
पीएम मोदी ने विपक्ष को अप्रत्यक्ष रूप से सलाह देते हुए कहा कि संसद को चुनावी मंच बनाने की परंपरा समाप्त होनी चाहिए। उन्होंने संदेश दिया कि “सदन में नारे नहीं, नीति पर चर्चा होनी चाहिए। ड्रामा कहीं और किया जा सकता है, लेकिन लोकतंत्र में डिलीवरी ही असली पहचान है।” उन्होंने चिंता व्यक्त की कि नए सांसद, विशेषकर युवा प्रतिनिधि, हंगामे के कारण बोल नहीं पाते और यह लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए नुकसानदायक है।
कांग्रेस सांसद गुरजीत सिंह औजला ने दावा किया कि शीतकालीन सत्र में वोटों की कथित हेरा-फेरी सबसे बड़ा मुद्दा रहेगा और सरकार को इसका जवाब देना पड़ेगा। राजनीतिक तनाव के बावजूद प्रधानमंत्री का जोर इस बात पर रहा कि विविध विचारों के बीच भी राष्ट्र निर्माण की भावना को सर्वोच्च महत्व मिलना चाहिए।
