वैश्विक हवाई यात्रा पर बड़ा प्रभाव देखने को मिल रहा है, क्योंकि एयरबस ने अपने A320 विमान मॉडल के 6000 विमानों को सॉफ्टवेयर जांच के लिए तुरंत ग्राउंड कर दिया है। यह फैसला एक गंभीर तकनीकी खतरे के सामने आने के बाद लिया गया, जिसमें उड़ान नियंत्रण के लिए आवश्यक डेटा तीव्र सौर विकिरण के कारण प्रभावित हो सकता है। एयरबस ने इसे एविएशन सुरक्षा से समझौता करने वाली स्थिति बताते हुए एहतियाती कदम उठाया है।
इस निर्णय के बाद इंडिगो और एयर इंडिया जैसी भारतीय एयरलाइनों ने यात्रियों को आगाह करते हुए कहा है कि देशभर में उड़ानों में देरी और रद्दीकरण की संभावना बढ़ गई है। कई अंतरराष्ट्रीय और घरेलू मार्ग प्रभावित हो सकते हैं और शेड्यूल लगातार अपडेट किया जाएगा।
तकनीकी जांच में यह पाया गया कि सोलर रेडिएशन से विमान के महत्वपूर्ण सिस्टम — ELAC (Elevator Aileron Computer) — द्वारा प्रोसेस होने वाले डेटा में गड़बड़ी हो सकती है, जिससे नोज (nose angle), पिच कंट्रोल और ऑटोपायलट जैसे अहम फ्लाइट पैरामीटर्स प्रभावित हो सकते हैं। अक्टूबर में हुई एक घटना के दौरान एक A320 विमान तेज़ी से ऊंचाई खो बैठा, जिसके बाद अंतरराष्ट्रीय एविएशन सुरक्षा एजेंसियां सक्रिय हो गईं।
रिकॉल प्रक्रिया के तहत:
🔹 पुराने A320 संस्करणों में ELAC हार्डवेयर पूरी तरह बदला जाएगा
🔹 नए संस्करणों में सॉफ्टवेयर अपडेट किया जाएगा
अधिकतर विमानों में अपग्रेड कुछ घंटों में पूरा हो जाएगा, लेकिन लगभग 1,000 विमान कई हफ्ते तक संचालन में वापस नहीं आ पाएंगे। इसका सीधा असर पीक ट्रैवल सीजन पर पड़ने की आशंका है।
वर्तमान में विश्वभर में लगभग 11,300 A320 विमान संचालित हैं — यानी हर दो में से एक विमान इस रिकॉल से प्रभावित है। एविएशन विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक सुधार कार्य नहीं पूरा होता, उड़ानों की समय-सारणी अनिश्चित बनी रह सकती है, और यात्रियों को यात्रा से पहले लगातार जानकारी लेते रहना चाहिए।

