पाकिस्तान और अफगानिस्तान की सीमा एक बार फिर तनाव के केंद्र में आ गई है। पाकिस्तान सेना ने खुलासा किया है कि अफगान तालिबान संगठित ढंग से आतंकियों और तस्करों की घुसपैठ कराने में मदद कर रहा है। पाक सेना के जनसंपर्क विभाग के प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ चौधरी ने कहा कि सीमा पर फायरिंग सिर्फ हिंसा नहीं है, बल्कि आतंकियों को कवर देने के लिए की जाने वाली रणनीतिक कार्रवाई है।
जनरल चौधरी के अनुसार अफगान सीमा चौकियों से पाकिस्तानी सैन्य पोस्टों पर हमला उसी समय होता है जब आतंकियों और तस्करों के लिए सीमा के खाली हिस्सों में मार्ग तैयार किया जाता है। उनका कहना है कि सीमापार नेटवर्क बेहद संगठित है और गाड़ियों एवं हथियारों की तस्करी भी फायरिंग के दौरान कराई जाती है।
🔹 सुरक्षा के लिए जटिल होती चुनौती
दोनों देशों के बीच 2,500 किलोमीटर लंबी ड्यूरंड लाइन पर कड़ी सुरक्षा के बावजूद अवैध घुसपैठ रोकना मुश्किल बना हुआ है। पाकिस्तान ने 15–25 किलोमीटर की दूरी पर सैन्य पोस्टों का नेटवर्क बनाया है, लेकिन सेना मानती है कि इतनी लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा को पूरी तरह सील करना संभव नहीं, विशेषकर पहाड़ी इलाकों और निर्जन मार्गों के कारण।
🔹 आतंकवाद विरोधी अभियानों के आँकड़े
पाकिस्तान ने हाल के महीनों में आतंकरोधी अभियानों को तेजी से बढ़ाया है।
📌 4 नवंबर के बाद से 4,910 खुफिया आधारित अभियानों को अंजाम दिया गया — औसतन दैनिक 233 अभियान।
📌 जनवरी से अब तक 67,023 ऑपरेशनों में 206 आतंकियों का सफाया किया गया।
📌 53,000 से अधिक अभियान बलूचिस्तान में और 12,800 से ज्यादा खैबर पख्तूनख्वा में संचालित किए गए।
पाकिस्तान सरकार ने एक बार फिर अफगान तालिबान पर तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) को पनाह और समर्थन देने का आरोप लगाया है, जिससे दोनों देशों के संबंधों में कड़वाहट बढ़ रही है।
🔹 संघर्षविराम पर सवाल
हाल में संघर्षविराम की कोशिशों के बावजूद स्थिति में सुधार नहीं दिखा है। पाकिस्तान का कहना है कि संघर्षविराम तभी प्रभावी हो सकता था जब अफगान तालिबान सीमा पर हमले रोकता — लेकिन हमले लगातार जारी हैं, जिससे विश्वास बहाली की संभावना कम होती जा रही है।
क्षेत्रीय विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कूटनीतिक बातचीत तेजी से आगे नहीं बढ़ी तो यह तनाव दक्षिण एशिया में सुरक्षा पर गंभीर प्रभाव डाल सकता है, विशेषकर सीमा व्यापार, शरणार्थी संकट और आतंकी नेटवर्क के संदर्भ में।

