IIM रायपुर में DG–IG Conference: राष्ट्रीय सुरक्षा, साइबर खतरों और विकसित भारत विज़न पर उच्चस्तरीय बैठक

DG–IG Conference का दूसरा दिन IIM रायपुर में शुरू — प्रधानमंत्री मोदी और अमित शाह की उपस्थिति में सुरक्षा रणनीतियों पर गहन समीक्षा

Cgdarshan
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आईआईएम रायपुर में चल रहे 60वें अखिल भारतीय डीजीपी–आईजीपी सम्मेलन का दूसरा दिन शनिवार सुबह बेहद महत्वपूर्ण सत्रों के साथ शुरू हुआ। देशभर के शीर्ष पुलिस अधिकारियों की उपस्थिति में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े व्यापक मुद्दों पर समीक्षा और रणनीति निर्माण का नेतृत्व किया। बैठक में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल भी विशेष रूप से मौजूद रहे।

इस उच्चस्तरीय सम्मेलन में उभरते सुरक्षा खतरों और तकनीक आधारित पुलिसिंग की दिशा में गंभीर चर्चा हो रही है। दूसरे दिन विभिन्न राज्यों के डीजीपी अपने प्रेज़ेंटेशन के माध्यम से आतंकवाद, साइबर अपराध, महिला सुरक्षा, संगठित अपराध, नक्सलवाद और सीमा पार खतरे जैसे विषयों पर आंकड़ों और भविष्य की रणनीतियों के साथ अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत कर रहे हैं।

सम्मेलन की थीम “विकसित भारत — सुरक्षित भारत” राष्ट्रीय विकास और सुरक्षा के संतुलित मॉडल को दर्शाती है। इसी क्रम में छत्तीसगढ़ के डीजीपी अरुण देव गौतम द्वारा बस्तर 2.0 — नक्सलवाद के उन्मूलन के बाद विकास और स्थायी शांति की दिशा पर विस्तृत प्रस्तुति दी जा रही है, जबकि आईबी के विशेष निदेशक ने आंतरिक सुरक्षा विज़न–2047 पेश करते हुए भविष्य की सुरक्षा प्रणाली के खाके को साझा किया।

दोपहर से लेकर देर शाम तक चलने वाली बैठकों में प्रधानमंत्री आतंकवाद विरोधी अभियानों, साइबर सुरक्षा नेटवर्क को सशक्त बनाने, फॉरेंसिक क्षमताओं के विस्तार और वैज्ञानिक अनुसंधान आधारित अपराध जांच मॉडल पर विमर्श में शामिल रहेंगे। बैठक के दौरान विदेशी भगोड़ों की वापसी रणनीति और जन–आंदोलनों के दौरान शांति व्यवस्था बनाए रखने के आधुनिक तरीकों पर भी चर्चा हो रही है।

सम्मेलन से जुड़े सभी वरिष्ठ अधिकारियों के लिए रायपुर में विशेष आवास और सुरक्षा व्यवस्था की गई है। पूरे देश से आए 33 राज्यों के डीजीपी, पैरामिलिट्री बलों के कमांडर और लगभग 75 वरिष्ठ पुलिस अधिकारी सम्मेलन में शामिल हैं, जिससे इसे भारत के सुरक्षा प्रबंधन इतिहास की सबसे महत्वपूर्ण रणनीतिक बैठक माना जा रहा है।

यह सम्मेलन भविष्य के भारत के लिए ऐसी सुरक्षा व्यवस्था तैयार करने की दिशा में एक निर्णायक कदम है जो तकनीक पर आधारित, तेज, पारदर्शी और जन–हित-केंद्रित हो।

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