भारतीय रिजर्व बैंक की नवीनतम मौद्रिक नीति समिति (MPC) बैठक आम जनता और अर्थव्यवस्था दोनों के लिए राहतभरी साबित हुई है। RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने शुक्रवार को घोषणा की कि रेपो रेट में कटौती की गई है, जिससे आने वाले महीनों में होम लोन, कार लोन और बिजनेस लोन की ब्याज दरों में कमी देखने को मिल सकती है। इससे लाखों कर्जदारों को EMI में सीधी बचत का फायदा मिलना तय है।
इसके साथ ही केंद्रीय बैंक ने FY2026 के लिए GDP वृद्धि अनुमान को 6.8% से बढ़ाकर 7.3% कर दिया है, जबकि महंगाई का अनुमान 2.6% से घटाकर केवल 2% कर दिया गया है। इसका मतलब है कि भारत तेज आर्थिक विकास के साथ कम महंगाई के ‘गोल्डीलॉक्स’ काल में कदम रख रहा है — जहां न तो मंदी का दबाव है और न ही अत्यधिक तेजी का जोखिम।
RBI का पॉलिसी रुख ‘न्यूट्रल’ रखा गया है, जिससे संकेत मिलता है कि बैंक अर्थव्यवस्था में विकास और स्थिरता दोनों को प्राथमिकता देना जारी रखेगा। विनिर्माण और सर्विस सेक्टर का मजबूत प्रदर्शन, घरेलू मांग और त्योहारी बिक्री के रिकॉर्ड आंकड़े अगले महीनों में इंडस्ट्री और रोजगार बाजार के बेहतर होने का संकेत देते हैं।
विदेशी मुद्रा भंडार 686 अरब डॉलर पर पहुंच चुका है, जो रुपये की मजबूती और आयात सुरक्षा के लिए बेहद सकारात्मक संकेत है। साथ ही, केंद्रीय बैंक ने यह भरोसा दिलाया कि बैंकिंग व्यवस्था में तरलता की कमी नहीं होने दी जाएगी ताकि ऋण वितरण और व्यापारिक गतिविधियां सुचारू रूप से जारी रहें।
कुल मिलाकर, RBI की मौद्रिक नीति रिपोर्ट भारत को मजबूत, स्थिर और उच्च विकास दर वाली अर्थव्यवस्था की दिशा में आगे बढ़ते हुए दिखा रही है — और आम नागरिकों के लिए लोन की सस्ती EMI इस पूरे फैसले की सबसे बड़ी सौगात है।
